कोरोना के तेजी से बढ़ते मामले के साथ ही देशभर में मास्क और पीपीई किट की मांग भी बढ़ने लगी है। इस वैश्विक महामारी से बचाव के लिए सभी के लिए मास्क लगाना अनिवार्य भी कर दिया गया है। ऐसे में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार से एन-95 मास्क की कीमत को लेकर अपनी मूल्य निर्धारण नीति पर पुनर्विचार करने को कहा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सुरक्षात्मक गियर सस्ती बनी रहे और कोविड-19 महामारी के दौरान इसकी जमाखोरी को रोका जा सके।
वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एस एस शिंदे की पीठ ने कहा कि केंद्र को आवश्यक वस्तुओं के मूल्य निर्धारण से संबंधित कानून को ध्यान में रखना चाहिए और एन-95 मास्क की कीमत को कम करना चाहिए। न्यायालय ने केंद्र से पहले ही स्पष्ट करने के लिए कहा था कि क्या वह एन 95 मास्क की कीमत की योजना बना रहा है।
न्यायालय में सुचेता दलाल और अंजलि दमानिया द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हो रही थी, जिसमें कहा गया था कि कोरोनो वायरस-प्रेरित लॉकडाउन के दौरान मास्क की कालाबाजारी को रोकने के लिए कीमतों को कैप करने की आवश्यकता है।
इस मामले में मंगलवार को केंद्र सरकार के वकील अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने अदालत को बताया कि इस तरह के मास्क की कीमत की योजना बनाने की कोई योजना नहीं है, क्योंकि सरकार के हस्तक्षेप के बाद उन्हें पहले से ही 47 प्रतिशत से कम कीमत पर बेचा जा रहा है। हालांकि एएसजी ने न्यायालय की बात मानते हुए कहा कि वो दामों में और कमी पर विचार करेगा।