पीएनबी घोटाले का आरोपी मेहुल चोकसी (फाइल फोटो)
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मेहुल चोकसी की याचिका पर 10 जून तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी है। चोकसी ने उच्च न्यायालय में दो याचिकाएं दाखिल की है। जिसमें एक उसे आर्थिक भगोड़ा घोषित किए जाने और दूसरी उसे उस व्यक्ति के साथ जिरह करने की अनुमति देने के लिए है, जिसके बयानों के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उसे भगोड़ा घोषित किया था।
इससे पहले तीन जून को ईडी ने डायमंड कारोबारी और पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के आरोपी मेहुल चोकसी को उच्च न्यायालय में भगोड़ा और फरार बताया था। ईडी ने कोर्ट में दिए अपने हलफनामे में चोकसी द्वारा दायर दो याचिकाओं को खारिज करने की मांग की है।
प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार को कोर्ट में दिए अपने हलफनामे में बताया था कि चोकसी पर पीएनबी घोटाले में 6,097 करोड़ रुपये का घोटोला करने का आरोप है। ईडी ने समन जारी कर उसे पेश होने का निर्देश दिया था लेकिन उसने जांच में सहयोग करने से इनकार कर दिया।
हलफनामे में कहा गया है कि मेहुल भगोड़ा और फरार है। वह जानबूझकर और इरादतन जांच एजेंसी के समक्ष पेश होने से बच रहा है जबकि एक विशेष अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। यह दर्शाता है कि उसके मन में देश के कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं है।
ईडी का कहना है कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून के तहत यदि कोई भगोड़ा खुद अदालत में पेश होता है तो कार्यवाही समाप्त की जा सकती है। हालांकि, अगर व्यक्ति पेश नहीं हुआ तो अदालत उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर सकती है और उसकी संपत्तियों को जब्त कर सकती है।