बॉम्बे हाईकोर्ट ने मानहानि के एक मामले को 2046 तक स्थगित करने के एक दिन बाद बुधवार को अपना आदेश संशोधित करते हुए मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2026 में तय कर दी। जस्टिस जितेंद्र जैन की पीठ ने मंगलवार को इस मामले को पक्षकारों के बीच अहंकार की लड़ाई बताते हुए सुनवाई की तारीख 2046 में दे दी थी। साथ ही पीठ ने कहा था कि इस तरह के मामले न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करते हैं, जिससे अधिक जरूरी मामलों की सुनवाई प्रभावित होती है।
हाईकोर्ट ने बदला अपना आदेश
अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि ऐसे विवाद न्याय प्रणाली को जाम कर देते हैं और प्राथमिकता वाले मामलों पर सुनवाई में बाधा बनते हैं। इस पर बुधवार को वादी तारिणीबेन देसाई की ओर से उनके वकील स्वराज जाधव ने अदालत में आवेदन दाखिल कर मंगलवार के आदेश में उनके खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने का अनुरोध किया। जिस पर न्यायमूर्ति जैन ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए संबंधित टिप्पणियों को हटाने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई की तारीख भी 2046 से बदलकर 15 जुलाई 2026 कर दी।
क्या है पूरा मामला
दरअसल 90 वर्षीय देसाई ने 2017 में किलकिलराज भंसाली के खिलाफ यह मानहानि का मुकदमा दायर किया था, जो मुंबई की श्याम को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के भीतर हुए विवाद से जुड़ा है। विवाद का केंद्र 2015 की वार्षिक आम बैठक से जुड़े नोटिस और प्रस्ताव हैं, जिनमें देसाई को सोसाइटी से निष्कासित करने का प्रस्ताव शामिल था। जिस पर देसाई ने 20 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग करते हुए दावा किया है कि सोसाइटी की बैठक में जो बातें हुई, उससे उनके मान की हानि हुई। जिससे उन्हें मानसिक उत्पीड़न और कष्ट हुआ।
2018 में अदालत को इस मामले में समझौते की संभावना से अवगत कराया गया था, लेकिन वह सफल नहीं हो सका। इसके बाद अदालत ने सिविल ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए मुद्दे तय किए। हाईकोर्ट ने मंगलवार के आदेश में कहा था कि पिछली सुनवाई के दौरान पक्षकारों को बिना शर्त माफी देने पर मामला सुलझाने का सुझाव दिया गया था। हालांकि, देसाई ने मानहानि के मुकदमे को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उनके वकील स्वराज जाधव ने बुधवार को बताया कि वह अब भी इस मामले को आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं।