चार्जशीट में यौन अपराधों के पीड़ितों की पहचान उजागर न करें
एक अन्य मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सभी जांच एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि वे आरोपपत्र में यौन अपराधों के पीड़ितों की पहचान का खुलासा ना करें। इतना ही नहीं अदालत ने निर्देश का पालन नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। 8 फरवरी को हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच के जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और अभय वाघवासे की खंडपीठ ने कहा कि जांच एजेंसियों को ऐसे मामलों में संवेदनशील होना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि ऐसे दस्तावेज जिसमें पीड़ित की पहचान हो रही हो उन्हें केवल सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत किया जाए।
पीठ ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 228-ए कुछ अपराधों के पीड़ित की पहचान का खुलासा करने पर रोक लगाती है, लेकिन समय-समय पर देखा गया कि इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा था। 27 वर्षीय विधवा से बलात्कार के आरोपी 33 वर्षीय व्यक्ति को जमानत देने के आदेश में न्यायाधीशों ने यह टिप्पणी की।