बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के एक फैसले पर यथास्थिति का आदेश दिया है, जिसमें उन्होंने झुग्गी वालों के लिए आवंटित भूमि को कथित तौर पर निजी व्यक्तियों के नाम करने का निर्देश दिया था। शिंदे ने यह फैसला पिछली उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार में लिया था, जब वह मंत्री थे।
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अदालत 2004 से नागपुर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (एनआईटी) द्वारा राजनेताओं और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों को किए गए भूमि आवंटन की निगरानी कर रही है। हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर आरोप लगाया गया था कि एनआईटी ने नेताओं और अन्य लोगों को कम दरों पर जमीन दी थी।
14 दिसंबर को एमिकस क्यूरी आनंद परचुरे ने पीठ को सूचित किया था कि शिंदे ने एमवीए सरकार में शहरी विकास मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान एनआईटी को 16 निजी व्यक्तियों को झुग्गी वालों के लिए आवास योजना के तहत अधिग्रहित भूमि देने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा कि अगर दावा किया गया ऐसा कोई आदेश वास्तव में पारित होता है तो हम अधिकारियों को अगली तारीख तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश देंगे। इस मामले की फिर से 4 जनवरी, 2023 को सुनवाई होगी।
महाराष्ट्र विधान परिषद में हंगामा
वहीं, इस मुद्दे पर महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्षी दलों ने मंगलवार को जमकर हंगामा किया, जिसके कारण सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। एकनाथ शिंदे के इस फैसले के मुद्दे पर विपक्ष और सत्ताधारी दलों के सदस्यों के बीच बहस हुई। उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन में कहा कि उनकी सरकार ने किसी को महंगे प्लॉट कम रेट पर नहीं दिया है।