अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग ने बुधवार को अपने एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट को विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के लिए भारतीय नौसेना की डेक-आधारित जेट की आवश्यकता को पूरा करने के लिए सबसे अच्छे प्लेटफॉर्म के रूप में पेश किया। बोइंग के शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि अगर एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट ब्लॉक III का चयन किया जाता है, तो कंपनी का अनुमान है कि यह अगले 10 वर्षों में भारतीय एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग पर 3.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आर्थिक प्रभाव डालेगा।
नौसेना ने हॉर्नेट और राफेल को शॉर्टलिस्ट किया
नौसेना ने खरीद के लिए एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट और फ्रांसीसी एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन द्वारा निर्मित राफेल एम विमानों को शॉर्टलिस्ट किया है। चार साल पहले भारतीय नौसेना ने अपने विमानवाहक पोत के लिए 57 बहु-भूमिका वाले लड़ाकू विमान हासिल करने की प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि नौसेना ने शुरुआत में 26 विमान खरीदने की योजना बनाई है।
बोइंग इंडिया के अध्यक्ष सलिल गुप्ते ने कहा कि एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट ब्लॉक III भारतीय नौसेना के लिए सबसे अच्छा डेक-आधारित विमान होगा और कंपनी की योजना अपनी 'मेक इन इंडिया' पहल को और मजबूत करने की है। यह देश के स्वदेशी एयरोस्पेस और रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में एक सफल ट्रैक रिकॉर्ड पर निर्माण में योगदान देगा। उन्होंने कहा कि बोइंग को अगले 10 वर्षों में भारतीय एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग पर 3.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर के आर्थिक प्रभाव का अनुमान है, जिसमें एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट भारत का अगला वाहक-आधारित लड़ाकू विमान होगा।
उन्होंने कहा कि भारत के लिए एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट का चयन भारत के रक्षा उद्योग में निवेश को बढ़ावा देने में मदद करेगा। गुप्ते ने कहा कि बोइंग की योजना अपने मौजूदा औद्योगिक आधार पर निर्माण करने और भारत में पांच स्तंभों में निरंतर निवेश के साथ 'आत्मनिर्भ भारत' के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करने की है। इनमें आपूर्ति श्रृंखला विकास और विनिर्माण; इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण; दीर्घकालिक समर्थन और प्रशिक्षण; अवसंरचना निवेश शामिल हैं।