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Bodoland silk: हथियार छोड़ अब आसमान छूने की तमन्ना, बोडोलैंड में तैयार हो रही 1 लाख रुपये की सिल्क साड़ी

सार

बोडोलैंड में अब कई लाख लोग सिल्क उत्पादन में लगे हैं। एरी सिल्क तो बोडोलैंड की विरासत है। मूगा और मलबरी के साथ एरी सिल्क के लिए कीट पालन, कताई और बुनाई की कला को आगे बढ़ाया जा रहा है। एरी सिल्क, बोडोलैंड के लोगों की संस्कृति और परंपरा के साथ बहुत निकटता से जुड़ी है। कोकराझार, चिरांग और बक्सा सहित दूसरी जगहों पर सिल्क उत्पादन के लिए तकनीकी और आर्थिक मदद प्रदान की जा रही है। 
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बोडोलैंड में तैयार हो रही एक लाख रुपये की सिल्क साड़ी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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असम का बोडोलैंड अब करवट ले रहा है। साल 2020 में विद्रोह और हथियारों से नाता तोड़ कर शांति एवं विकास की राह पर चलने वाला बोडोलैंड अब सिल्क उत्पादन में वैश्विक पटल पर छाने की तरफ कदम बढ़ा रहा है। बोडोलैंड में चार-पांच लाख लोग, जिनमें महिलाओं की एक बड़ी संख्या है, सिल्क उत्पादक में लगे हैं। इन लोगों का जीवन बदल रहा है। इस काम में युवा भी आगे आ रहे हैं। कच्ची एरी सिल्क का उत्पादन 2023-24 में 1464 मीट्रिक टन था, जबकि 2019-20 में यह उत्पादन 1369 मीट्रिक टन था। 2027 तक सिल्क के उत्पादन को 2000 मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। बोडोलैंड में मूगा सिल्क की साड़ी एक लाख रुपये में तैयार होती है। एरी सिल्क, जिसे क्रूरता-मुक्त, अहिंसा और शांति रेशम के नाम से जाता है, इसके उत्पादन पर ज्यादा फोकस है। इसके बाद मलबरी और मूगा सिल्क का नंबर आता है। देश विदेश में एरी सिल्क के वस्त्र अपने पर्यावरण-अनुकूल गुणों के कारण अच्छी खासी लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं।

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बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद के (बीटीसी) चीफ प्रमोद बोरो कहते हैं, 2020 में शांति समझौता होने के बाद बोडोलैंड के सभी पांच जिलों में विकास की राह तैयार की गई है। ग्रामीणों के पास रोजगार के कोई खास संसाधन नहीं थे। सभी लोगों के पास कृषि योग्य भूमि नहीं थी, ऐसे में उन्हें रोजगार का एक ठोस प्लेटफार्म उपलब्ध कराने के लिए सिल्क उत्पादन पर जोर दिया गया है। 

कई लाख लोग, सिल्क उत्पादन में लगे हैं। एरी सिल्क तो बोडोलैंड की विरासत है। मूगा और मलबरी के साथ एरी सिल्क के लिए कीट पालन, कताई और बुनाई की कला को आगे बढ़ाया जा रहा है। एरी सिल्क, बोडोलैंड के लोगों की संस्कृति और परंपरा के साथ बहुत निकटता से जुड़ी है। कोकराझार, चिरांग और बक्सा सहित दूसरी जगहों पर सिल्क उत्पादन के लिए तकनीकी और आर्थिक मदद प्रदान की जा रही है। 

बोडोलैंड में सिल्क उत्पादन। - फोटो : अमर उजाला
चिरांग में मूगा वाइल्डलाइफ सेंचुरी स्थापित की गई है। यहां के लोग अपनी मेहनत से डेढ़ लाख रुपये तक की सालाना आय प्राप्त कर रहे हैं। चिरांग जिले के ढाई सौ से अधिक गांवों में रेशम उत्पादन हो रहा है। दस हजार से अधिक परिवार सीधे तौर पर रेशम उत्पादन गतिविधियों में शामिल हैं। बक्सा जिले के मुशालपुर में एकीकृत टेक्सटाइल पार्क में पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा एरी सिल्क स्पिनिंग प्लांट स्थापित किया गया है। अदाबारी कोकराझार में स्थित सेरी कल्चर निदेशालय के डायरेक्टर ए चक्रवर्ती बताते हैं कि बोड़ोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (बीटीआर) के रेशम उत्पादन विभाग द्वारा लोगों को सिल्क तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एक हजार रुपये प्रति किलो तक कूकून बिक रहा है। तीन सौ रुपये प्रति किलोग्राम की दर से पूमा बेचा जा रहा है। जो भी व्यक्ति कूकून लेकर आता है, उसे विभाग द्वारा खरीदा जाता है। किसी भी व्यक्ति को वापस नहीं लौटाया जाता। साठ दिन में रेशम कीट की गतिविधियां पूरी हो जाती हैं। साठ दिन के बाद धागा तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है।

सेरी कल्चर मिशन में 44 हजार से अधिक परिवार लगे हैं। तीन हजार गांवों में सेरी कल्चर को लेकर काम हो रहा है। पिछले चार वर्षों के दौरान 829 स्पीनर और बुनकर को मदद प्रदान की गई है। वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक 1560 से अधिक परिवारों को बीटीसी-एसओपीडी द्वारा मदद प्रदान की गई है। इसी अवधि के दौरान 2028 परिवारों को विदेशी एजेंसियां सीएसबी, विश्व बैंक व एडीपी आदि से भी मदद दी गई है। वित्त वर्ष 2023-24 में कुल कूकून प्रोडेक्शन, जिसमें ऐरी, मलबरी और मूगा शामिल है, 3785 मीट्रिक टन हुआ है। 2019-20 में यह उत्पादन 3720 मीट्रिक टन रहा था। वित्त वर्ष 2023-24 में ऐरी, मलबरी और मूगा का कच्चा सिल्क उत्पादन 1505 मीट्रिक टन रहा है। 2019-20 में तीनों तरह की सिल्का का कच्चा उत्पादन 1417 मीट्रिक टन रहा था। वित्त वर्ष 2023-24 में एरी कूकून प्रोडेक्शन 1830 मीट्रिक टन था, जबकि वित्त वर्ष 2019-20 में यह उत्पादन 1711 मीट्रिक रहा रहा था। कच्ची एरी सिल्क का उत्पादन 2023-24 में 1464 मीट्रिक टन था, जबकि 2019-20 में यह उत्पादन 1369 मीट्रिक टन था। सिल्क उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उदालगुरी और कोकराझार में कूकून बैंक स्थापित किया गया है। 

बोडोलैंड में बनाई जा रही एक लाख रुपये की सिल्क की साड़ी। - फोटो : अमर उजाला
कोकराझार और बरामा 'बक्सा' में एरी स्पून सिल्क मिल और चिरांग में मूगा वाइल्डलाइफ सेंचुरी स्थापित की गई है। कोकराझार में आटोमेटिक सिल्क नीटिंग यूनिट लगाई गई है। यहीं पर आटोमेटिक डिजिटल सिल्क प्रिंटिंग एंड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की गई है। कोकराझार में बोडोलैंड सिल्क पार्क बनाया गया है। उदालगिरी में 10 अंबार चरखा यूनिट स्थापित की गई हैं। यहीं पर बुनकरों के लिए सीएफसी की सुविधा प्रदान की गई है। कोकराझार में लाभार्थियों के लिए बड़े स्तर पर रियरिंग हाउस तैयार किए गए हैं। 

बोडोलैंड सेरी कल्चर मिशन 5 अगस्त 2023 को लांच किया गया है। इसके तहत 40 हजार से अधिक सिल्कवोर्म परिवारों को रोजगार मुहैया कराना है। साथ ही 10 हजार से ज्यादा बुनकरों को भी बेरोजगारी से बाहर निकालना है। 2027 तक सिल्क के उत्पादन को 2000 मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। सिल्क वोर्म परिवारों की आय को डेढ़ लाख रुपये सालाना तक पहुंचाया जाएगा। सिल्क बुनकरों के लिए मार्केटिंग सिस्टम को चैनलाइज्ड किया जाएगा। 

सिल्क उत्पादन पर जोर। - फोटो : अमर उजाला
हिरणया देवी निदेशक, बीटीसी हैंडलूम एंड टेक्सटाइल डिपार्टमेंट कोकराझार ने बताया, मूगा सिल्क महंगा क्यों हैं। वजह, मलबरी सिल्क कहीं भी मिलता है, लेकिन मूगा सिल्क केवल असम में ही मिलता है। मूगा और एरी सिल्क को असम का जीआई टैग मिल चुका है। असम की पर्यावरण परिस्थितियां मूगा के उत्पादन में सहायक हैं। एरी फाइबर को अहिंसा सिल्क भी बोलते हैं। इसके मेडिकल बेनिफिट हैं। इसे गर्मी में भी पहन सकते हैं। गर्मी में ठंडा रहेगा और सर्दी में गर्म रहेगा। यह रेशम अपनी खूबसूरती, आराम और प्राकृतिक रेशे के लिए जाना जाता है। यह थर्मल स्टैटिक है और पहनने में आसान है। अपनी समृद्ध विशेषताओं के चलते इसे रेशों के साथ मिलाकर गर्मी और सर्दी, दोनों तरह के मौसम के लिए तैयार किया जा सकता है।
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मूगा सिल्क अल्ट्रा यूवी प्रोटेक्शन का काम भी करता है। एक बड़ी शूज कंपनी में भी इसका इस्तेमाल होता है। सभी नेचर और प्रोटीन फाइबर हैं। सभी की अपनी विशेषता है। एरी सिल्क पर ज्यादा फोकस है। इसका उत्पादन भी ज्यादा है। इसके मेडिकल बेनिफिट भी हैं। कीट को चिड़ियां न खाएं, इसके लिए सोम के पेड़ों को जाल में रखा जाता है। 60 दिन में रेशम तैयार होने की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। बोडोलैंड की महिलाएं रेशम कीट के कोकून से निकाले गए इंडी रेशम कातती हैं। इससे बोडोलैंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मदद मिलती है। मूगा रेशम या सुनहरी धागा, मूगा कृमि (एन्थेरिया असमा) से निकाला जाता है। यह असम की जलवायु के लिए स्थानिक है। सिल्क उत्पादन के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। डिगमिंग, हाइड्रो एक्सट्रैक्टर, हॉट एयर ड्रायर, प्यूपा राइडर, कोकून ओपनर, फाइबर कटर, बेल, प्रेस, चीज, टीएफओ, कोन वाइंडिंग  और रीलिंग जैसे तकनीकी उपकरण लगाए जा रहे हैं। 
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