आवामी लीग की अनुपस्थिति में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को बांग्लादेश आम चुनाव में मिली प्रचंड जीत पर भारत ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। जनादेश आने के बाद भावी पीएम नरेंद्र मोदी की बीएनपी के मुखिया तारिक रहमान से बात और उससे पहले दोनों देशों के बहुआयामी संबंधों को मजबूत करने की इच्छा जता कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पड़ोसी देश को सकारात्मक संदेश दिया है। हालांकि शेख हसीना के तख्तापलट के बाद निम्रतम स्तर पर पहुंचे दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्ते को पटरी पर लाने के लिए भारत चरणबद्ध तरीके से सावधानी के साथ कदम आगे बढ़ाएगा।
सरकारी सूत्र ने कहा कि भले ही चुनाव से मुख्य धारा की अहम पार्टी अवामी लीग अनुपस्थित रही, मगर उम्मीद है कि एक चुनी हुई सरकार अंतरिम सरकार की तरह व्यवहार नहीं करेगी। चूंकि अंतरिम सरकार का रुख एकपक्षीय था, इसलिए दोनों देशों के संबंध बेपटरी हो गए। अब जबकि एक चुनी हुई सरकार आने वाली है, तब उम्मीद है कि दोनों देशों के रिश्ते धीरे-धीरे पटरी पर आ सकते हैं। हालांकि जहां तक भारत के रुख की बात है तो हम नई सरकार का उन मुद्दों पर स्पष्ट रुख जानना चाहेंगे, जिसके कारण अंतरिम सरकार के रहते दोनों देशों के संबंध अपने निम्रतम स्तर पर पहुंच गए।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
कूटनीतिक विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी का मानना है कि अभी बहुत कुछ साफ होना जरूरी है। जहां तक आम चुनाव की बात है तो इसमें मुख्य खिलाड़ी अवामी लीग प्रतिबंधित था। इसकी जगह शेख हसीना के रहते अप्रत्यक्ष गठजोड़ से चलने वाली बीएनपी और जमात ए इस्लामी आमने सामने थी। खास बात यह है कि इस चुनाव में 2008 और 2018 की 80 फीसदी से अधिक की तुलना में महज 48 फीसदी मतदान हुए। ठीक उसी तरह जैसे 2024 में बीएनपी के बहिष्कार के कारण कम वोट पड़े। इसका मतलब है कि बीते दो चुनाव में क्रमश: बीएनपी और अवामी लीग के समर्थकों ने मतदान से दूरी बना ली थी। फिर जमात ए इस्लामी बीएनपी पर चुनाव में धांधली का आरोप लगा रहा है। उसका कहना है कि शेख हसीना के विरोध में फूटे आक्रोश के केंद्र में बीएनपी नहीं जमात ए इस्लामी है। ऐसे में सवाल है कि तारिक इस परिस्थिति से कैसे निपटेंगे। फिर उन पर युवाओं के आक्रोश के बीच उनकी इच्छा के अनुरूप नया बांग्लादेश बनाने का दबाव होगा। इसलिए हमें किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले थोड़ा इंतजार करना होगा।
नई सरकार की राह, चुनौतियों से भरी
मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार के अतार्किक और अपरिपक्वता के कारण रिश्ते पटरी से उतरे। सूत्र का मानना है कि चूंकि भौगोलिक जुड़ाव, सीमा प्रबंधन, साझा सुरक्षा, व्यापार, खाद्य सुरक्षा जैसे कई अहम मामले में जिस क्षेत्र में बांग्लादेश भारत की अनदेखी नहीं कर सकता। चुनी हुई सरकार की जिम्मेदारी अंतरिम सरकार की तुलना में ज्यादा है। ऐसे में नई सरकार को भारत के संदर्भ में परिपक्व भूमिका निभानी होगी।
यहां से मिलेंगे संकेत
सूत्र ने कहा कि अगर नई सरकार ने आते ही पूर्व पीएम शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मामला उठाया तो द्विपक्षीय रिश्ते में खटास बनी रहेगी। जिस प्रकार अंतरिम सरकार में रहते बांग्लादेश में कई तत्वों ने भारतीय भूभाग पर दावा जताया। अपने यहां हुई हत्याओं के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया, भारत की तुलना में पाकिस्तान और चीन को तरजीह दी, उससे स्थिति और बिगड़ गई। अब देखना होगा कि नई सरकार रिश्ते बिगाड़ने वाले इन मुद्दों पर क्या रुख अपनाती है।
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रहमान के सलाहकार ने क्या कहा?
बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान के सलाहकार सैयद मोअज्जमम हुसैन अलाला ने शुक्रवार को कहा कि उनकी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलने के साथ विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी का भी मजबूत होकर उभरना देश के हित में है। उन्होंने कहा कि पक्ष-विपक्ष की यह जोड़ी लोकतांत्रिक क्रांति के आगे की राह को बेहतरीन बनाएगी।
वहीं, बीएनपी की चुनाव प्रबंधन समिति के प्रमुख रहे नजरुल इस्लाम खान ने कहा कि तारिक रहमान ने नेतृत्व में भारत-बांग्लादेश रिश्ते और मजबूत होंगे। अलाला ने कहा कि यह चुनाव आयोग, अंतरिम सरकार, राजनीतिक दलों और सबसे महत्वपूर्ण, देश की आम जनता के सहयोग से आयोजित एक ऐतिहासिक चुनाव था। हमने चारों घटकों के बीच सफलतापूर्वक एक सेतु का निर्माण किया है। नतीजे आ चुके हैं और बांग्लादेश की जनता ने अपनी पसंद व्यक्त करते हुए बीएनपी को पूर्ण बहुमत प्रदान किया है।
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