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CJI: 'जजों को परफेक्ट मान लेने से न्यायिक नेतृत्व को नुकसान होता है', सीजेई की बैठक में बोले CJI सूर्य कांत

Sat, 14 Feb 2026 04:27 AM IST
निर्मल कांत एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

CJI: सीजेआई सूर्य कांत ने कहा कि न्यायाधीश का परिपूर्ण होने का दिखावा न्यायिक नेतृत्व को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने न्यायिक सुधार के लिए राष्ट्रमंडल न्यायिक निकाय के निर्माण का सुझाव दिया। पढ़ें रिपोर्ट-
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जस्टिस सूर्यकांत - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि जब हम मान लेते हैं कि न्यायाधीश परिपूर्ण (परफेक्ट) हैं तो न्यायिक नेतृत्व को नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि न्यायिक नेतृत्व इसलिए प्रभावित नहीं होता क्योंकि न्यायाधीश अपूर्ण होते हैं, बल्कि यह तब प्रभावित होता है जब न्यायाधीश यह दिखावा करते हैं कि वे अपूर्ण नहीं हैं।
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सीजेआई शुक्रवार को यहां राष्ट्रमंडल न्यायिक शिक्षकों (सीजेई) की 11वीं द्विवार्षिक बैठक के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि न्यायिक संस्थानों की तरह न्यायाधीश भी विकास, सुधार और उन्नति के लिए सक्षम रहते हैं। उन्होंने न्यायिक नेतृत्व की धारणा में आमूलचूल परिवर्तन का भी आह्वान किया और सदस्य देशों में न्यायिक शिक्षा, बार और न्यायपालिका को एकीकृत करने के लिए एक राष्ट्रमंडल सर्वोच्च निकाय के निर्माण की वकालत की।

उन्होंने कहा कि इतिहास में, सबसे सम्मानित न्यायिक नेताओं ने कभी भी त्रुटिहीनता या पूर्णता का प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि, सर्वश्रेष्ठ नेता वे थे जो अपने ज्ञान की सीमाओं के प्रति सचेत रहे, त्रुटि की संभावना के प्रति सतर्क रहे और सीखने के लिए खुले रहे। उन्होंने कहा, विनम्रता कभी भी केवल एक व्यक्तिगत गुण नहीं रही है। यह एक पेशेवर सुरक्षा कवच रही है। मेरा मानना है कि इस महत्वपूर्ण उपकरण को बिना किसी अपवाद के हर न्यायिक अपफसर को सिखाया जाना चाहिए। 
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सीजेई परिवर्तनकारी यात्राओं के पीछे मौन सूत्रधार: सीजेआई ने यह भी कहा कि न्यायिक नेतृत्व को शिक्षित करने के लिए, एक अधिक ईमानदार आधार को स्वीकार करने की आवश्यकता है। न्यायाधीश उन संस्थानों की तरह जिनका वे नेतृत्व करते हैं, विकास, सुधार और उन्नति करने में सक्षम रहते हैं। उनका मानना है कि यहीं पर सीजेई की भूमिका आती है। सीजेई परिवर्तनकारी यात्राओं के पीछे मौन सूत्रधार होते हैं।

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