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Worli Hit and Run Case: आरोपी मिहिर को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, अवैध गिरफ्तारी के आधार पर रिहाई से किया इनकार

Mon, 25 Nov 2024 12:04 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

मिहिर शाह ने नौ जुलाई को मुंबई के वर्ली इलाके में अपनी बीएमडब्ल्यू कार से एक दोपहिया वाहन को कथित तौर पर टक्कर मार दी थी। इससे 45 वर्षीय महिला कावेरी नखवा की मौत हो गई थी।
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आरोपी मिहिर शाह - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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मुंबई का बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन मामला पिछले कुछ महीने काफी सुर्खियों में रहा। इस मामले के मुख्य आरोपी मिहिर शाह को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने शाह को अवैध गिरफ्तारी के आधार पर रिहा करने से इनकार कर दिया। 

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दरअसल, पूर्व शिवसेना नेता के 24 वर्षीय बेटे शाह और उसके कार चालक राजर्षि बिदावत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है और उन्होंने तत्काल रिहाई का अनुरोध किया था।

क्या है मामला?
तेज रफ्तार बीएमडब्ल्यू कार ने मुंबई के वर्ली इलाके में नौ जुलाई को कावेरी नखवा नामक महिला को कुचल दिया था। कार ने महिला को करीब दो किलोमीटर तक घसीटा था। इस हादसे में उनके पति प्रदीप नखवा भी घायल हो गए थे। दुर्घटना के बाद, मिहिर दो दिनों से अधिक समय तक लापता था। वह उसी बीएमडब्ल्यू कार से बांद्रा के कला नगर इलाके में गया था। दुर्घटना के समय कार में मौजूद शाह के वाहन चालक बिदावत को घटना के दिन गिरफ्तार किया गया था।
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मामले में खुलासा हुआ था कि घटना के बाद मिहिर ने अपने पिता राजेश शाह को फोन किया था और घटना के बारे में बताया था। इसके बाद, राजेश ने अपने बेटे को शहर छोड़ने की सलाह दी थी और उससे कहा था कि राजरिशी दुर्घटना की जिम्मेदारी ले लेगा। अपने पिता से बातचीत के बाद मिहिर इधर-उधर छिपने लगा था। हालांकि, पुलिस ने घटना के दो दिन बाद उसे गिरफ्तार कर लिया था। 

अब क्या दे रहे दलील?
आरोपियों ने दलील दी कि पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के समय उन्हें गिरफ्तार किए जाने के आधार के बारे में नहीं बताया था और उनका दावा है कि यह कानून का उल्लंघन है। हालांकि, न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने सोमवार को याचिकाओं को खारिज कर दिया। 

दोनों आरोपियों ने अपनी रिहाई का अनुरोध करते हुए दावा किया था कि उन्हें और हिरासत में रखना संवैधानिक आदेश और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 50 का उल्लंघन होगा। बता दें, इस धारा के तहत, पुलिस को किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय उसे उस अपराध के बारे में पूरी जानकारी देनी होती है जिसके लिए उसे गिरफ्तार किया जा रहा है या यह बताना होता है कि उसकी गिरफ्तारी के लिए अन्य आधार क्या हैं। शाह और बिदावत दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

अगस्त में दायर की थी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
हाईकोर्ट में अगस्त में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं में शाह और बिदावत ने दावा किया था कि उनकी गिरफ्तारी गैरकानूनी है और उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। शाह ने अपनी याचिका में पहले उसे पुलिस हिरासत और फिर न्यायिक हिरासत में भेजने के एक स्थानीय अदालत के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया। उसने अपनी गिरफ्तारी को अवैध घोषित किए जाने का अनुरोध किया था।

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