Mumbai Civic Elections: मुंबई बीएमसी चुनाव से पहले आठ उम्मीदवारों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि उनके नामांकन पत्र राहुल नार्वेकर के दबाव में खारिज किए गए। मामला कोलाबा क्षेत्र के वार्डों से जुड़ा है। विपक्ष ने निष्पक्ष चुनाव पर भी सवाल उठाए हैं।
मुंबई महानगरपालिका चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। आठ उम्मीदवारों ने आरोप लगाया है कि उनके नामांकन पत्र जानबूझकर स्वीकार नहीं किए गए। इस मामले को लेकर उम्मीदवारों ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। आरोप है कि यह कदम भाजपा विधायक और महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के इशारे पर उठाया गया।
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याचिका के अनुसार, इन आठ उम्मीदवारों समेत कई निर्दलीय प्रत्याशियों ने वार्ड संख्या 224 से 227 के लिए सभी जरूरी दस्तावेज और जमानत राशि के साथ नामांकन दाखिल किया था। इसके बावजूद रिटर्निंग ऑफिसर ने उनके फॉर्म स्वीकार नहीं किए। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि रिटर्निंग ऑफिसर पर राजनीतिक दबाव डाला गया, जिससे उन्हें चुनाव प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
कौन से इलाके और क्यों अहम?
ये सभी वार्ड दक्षिण मुंबई के कोलाबा विधानसभा क्षेत्र में आते हैं, जहां से राहुल नार्वेकर विधायक हैं। याचिका में दावा किया गया है कि स्पीकर होने के बावजूद नार्वेकर ने अपनी राजनीतिक हैसियत का दुरुपयोग किया। आरोप है कि पुलिस मशीनरी का इस्तेमाल कर उम्मीदवारों को रिटर्निंग ऑफिसर के दफ्तर से बाहर निकाल दिया गया, जिससे निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
हाईकोर्ट में सुनवाई की स्थिति
मामले को मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड़ की पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए रखा गया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका पर नियमानुसार समय आने पर सुनवाई की जाएगी। याचिकाकर्ताओं ने राज्य निर्वाचन आयोग से भी शिकायत की थी, लेकिन उनका कहना है कि वहां से कोई राहत नहीं मिली।
विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
इस विवाद के बीच यह भी सामने आया है कि राहुल नार्वेकर के भाई मकरंद नार्वेकर, बहन गौरी शिवलकर और भाभी हर्षिता शिवलकर इन्हीं वार्डों से चुनाव मैदान में हैं। विपक्षी दलों ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन, नामांकन प्रक्रिया में दखल और सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ जैसे आरोप लगाए हैं। हालांकि, नार्वेकर ने सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।