पिछले हफ्ते दक्षिण कोरिया में के-9 हॉइटसर तोप धमाके में दो सैनिकों की मौत हो गई। के-9 हॉइटसर तोप में धमाके के बाद इसके प्रदर्शन पर ही सवाल उठने लगे हैं। भारत में भी इसी प्लेटफॉर्म पर वज्र तोपों को विकसित किया जा रहा है।
कोरियन मीडिया ने हॉइटसर गन(तोप) की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है। शुक्रवार को तोप की ट्रेनिंग के दौरान हुए इस धमाके में पांच अन्य सैनिक भी घायल हो गए। जिसके बाद मीडिया ने तोप को लेकर कई तरह के सवाल उठाए।
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निजी सेक्टर की डिफेंस कंपनी लार्सन एंड टुब्रो और दक्षिण कोरिया की फ्रम हानवहा टेकविन भारत में इसी प्लेटफॉर्म पर के9 वज्र-टी तोप विकसित कर रहे हैं। 100 वज्र तोपों के लिए 720 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट हुआ है।
कॉन्ट्रैक्ट इस साल 21 अप्रैल को साइन किया गया था। हथियार महाराष्ट्र में पुणे के तालेगांव में विकसित किया जा रहा है। इस तोप अगले तीन सालों में भारतीय सेना को सौंप दी जाएगी। कोरियन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार सोमवार को दक्षिण कोरियन आर्मी ने के-9 तोपों की ट्रेनिंग रोकने का फैसला किया है।
दक्षिण कोरियन आर्मी ने ब्लास्ट की वजह साफ होने तक तोपों की ट्रेनिंग रोक दी है। एक रिपोर्ट के अनुसार 2016 में पार्लियामेंट्री जांच में पता चला कि पिछले पांच सालों में के-9 तोप की विश्वसनियता से जुड़े 1700 रिपोर्ट सामने आ चुके हैं।