जर्मनी में सार्वजनिक स्थलों पर हो रहे हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे। म्यूनिख हमले के बाद बावरिया शहर में रविवार को एक सीरियाई शरणार्थी ने खुद को उड़ा दिया। इसमें उसके अलावा किसी की मृत्यु तो नहीं हुई, लेकिन दर्जनों लोग घायल हो गए। इस हमले के बाद जहां लोगों के मन में सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाने को लेकर डर पैदा हो गया है। वहीं, सीरियाई शरणार्थियोें को देश में शरण देने पर भी सवाल उठने लगे हैं। पुलिस ने इसके आतंकी हमला होने की आशंका से अभी इनकार नहीं किया है।
27 वर्षीय सीरियाई शरणार्थी की योजना एक संगीत समारोह में बम धमाका करने की थी। हालांकि टिकट न होने की वजह से शरणार्थी को समारोह में शामिल नहीं होने दिया गया। इसके बाद अपनी ही गलती से उसका लाया बम फट गया और वह खुद ही इसका शिकार हो गया। यह धमाका बावरिया शहर के उस स्थान पर हुआ, जहां से थोड़ी ही दूरी पर एक संगीत समारोह चल रहा था। इस समारोह में दो हजार से भी ज्यादा लोग शामिल हुए थे। हालांकि धमाका करने वाले की अपनी गलती के चलते ही बम फट गया।
स्थानीय आंतरिक मामलों के मंत्री जोआचिम हरमन ने बताया कि यह सीरियाई शरणार्थी दिमागी रूप से बीमार था और उसने इससे पहले दो बार खुद को मारने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि इस हमले में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ हो, लेकिन लोगों के मन में डर जरूर बैठ गया है। उन्होंने आशंका जताई कि इस हमले के बाद सीरियाई शरणार्थियों को पनाह देने का लेकर सवाल उठ सकते हैं।