डॉक्टर राव ने बताया, आईएफएस ऑफिसर ने मुझे कहा था कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित रिपोर्ट ही कोर्ट में यह साबित कर सकती है कि वह शव काले हिरण का ही था। इसके बाद राव ने ये चेलेंज लिया और हैदराबाद के चिड़िया घर से काले हिरण के ब्लड सैंपल्स एकत्रित किए। फिर उनका मिलान मृत हिरण के सैंपल्स से किया गया।
इसके बाद राव ने काले हिरणों के डीएनए में विशिष्टताओं की स्थापना की। उन्होंने पॉलिमेराइज चेन रिएक्शन (पीसीआर) और रैंडम एम्प्लीफाइड पॉलिमोरफिक डीएनए (आरएपीडी) तकनीक के इस्तेमाल से पता लगाया कि दफनाए गए शव दो विभिन्न काले हिरणों के हैं।
जिसके बाद साल 2000 में डॉक्टर राव ने कोर्ट में गवाही देते हुए एक रिपोर्ट पेश की, जो साबित कर रही थी कि जिन जानवरों का
शिकार किया गया वह काले हिरण ही थे। हालांकि राव सलमान की सजा से खुश हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने पावरफुल लोगों को सजा देकर न्याय व्यवस्था में लोगों का भरोसा बढ़ाया है। बता दें कि राव और उनकी टीम ने ही 1999 में काले हिरण की पहचान करने की तकनीक का विकास किया था।