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काला हिरण मामला : जानिए कैसे एक DNA रिपोर्ट से कानून के शिकंजे में आए सलमान

Sat, 07 Apr 2018 01:39 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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काला हिरण शिकार मामले में सलमान खान को जोधपुर अदालत ने 5 साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही सलमान पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस मामले के अन्य आरोपी सोनाली बेंद्रे, सैफ अली खान, तब्बू और नीलम बरी हो गए हैं। सलमान को जेल तक पहुंचाने में DNA रिपोर्ट की अहम भूमिका रही है। इसी रिपोर्ट की वजह से ही आज सलमान जेल के अंदर हैं।  

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DNA ने कैसे की केस में मदद

सलमान को सजा दिलवाने में हैदराबाद के सेंटर फॉर फिंगरप्रिंट एंड डीएनए (CDFD) के वैज्ञानिक ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने काले हिरण के सैंपल्स से अहम सबूत जुटाए। 20 साल पुराने इस केस में डीएनए रिपोर्ट ही सलमान के लिए मुसीबत बनी। भारत में काला हिरण केस के बाद से ही वन्य जीवों से जुड़े अपराधों में डीएनए तकनीक की शुरुआत हुई।

सीडीएफडी के पूर्व वैज्ञानिक जीवी राव ने ही 1999 में सलमान का केस संभाला था। राव ने बताया कि सलमान के केस से पहले अवैध शिकार के मामलों में जानवरों की पहचान उनकी मनोवैज्ञानिक विशेषताओं के आधार पर होती थी। उन्होंने कहा भारतीय वन सेवा (IFS) के एक युवा अफसर ने इस केस में उनकी सहायता की। वह डीएनए तकनीक के जानकार थे और उन्होंने सीडीएफडी से कहा कि जब मनुष्य की पहचान डीएनए तकनीक से हो सकती है तो जानवरों की क्यों नहीं। वह काले हिरण की हड्डियां और अन्य सैंपल्स खोदकर लाए। 

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चिड़ियाघर से एकत्रित किए सैंपल

डॉक्टर राव ने बताया, आईएफएस ऑफिसर ने मुझे कहा था कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित रिपोर्ट ही कोर्ट में यह साबित कर सकती है कि वह शव काले हिरण का ही था। इसके बाद राव ने ये चेलेंज लिया और हैदराबाद के चिड़िया घर से काले हिरण के ब्लड सैंपल्स एकत्रित किए। फिर उनका मिलान मृत हिरण के सैंपल्स से किया गया। 

इसके बाद राव ने काले हिरणों के डीएनए में विशिष्टताओं की स्थापना की। उन्होंने पॉलिमेराइज चेन रिएक्शन (पीसीआर) और रैंडम एम्प्लीफाइड पॉलिमोरफिक डीएनए (आरएपीडी) तकनीक के इस्तेमाल से पता लगाया कि दफनाए गए शव दो विभिन्न काले हिरणों के हैं।

जिसके बाद साल 2000 में डॉक्टर राव ने कोर्ट में गवाही देते हुए एक रिपोर्ट पेश की, जो साबित कर रही थी कि जिन जानवरों का शिकार किया गया वह काले हिरण ही थे। हालांकि राव सलमान की सजा से खुश हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने पावरफुल लोगों को सजा देकर न्याय व्यवस्था में लोगों का भरोसा बढ़ाया है। बता दें कि राव और उनकी टीम ने ही 1999 में काले हिरण की पहचान करने की तकनीक का विकास किया था।
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