रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय छात्र इस सर्वे के तहत बेशक ओवरऑल में चीन और रूस से पीछे हैं, लेकिन सीखने की क्षमता में इन सबसे आगे हैं। ज्ञान के मामले में रूस और चीन के छात्र भारतीय छात्रों से बेहतर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मुख्य कारण भारतीय स्कूली शिक्षा में गुणवत्ता कम होना मुख्य है। चीन में स्कूली शिक्षा को मुख्य रूप से फोकस किया जाता है। भारतीय छात्रों में मैथमेटिक्स और फिजिक्स सीखने की प्रवृति सबसे अच्छी होती है।
फिजिक्स में लड़कियां पीछे
अध्ययन के मुताबिक, बेशक स्कूली रिजल्ट में बेटियां बेहतर अंक लेकर लड़कों से आगे रहती हैं, लेकिन इंजीनियरिंग की पढ़ाई में वे बेहद दबाव झेलती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इंजीनियरिंग के पहले वर्ष में छात्राएं ज्ञान के मामले में छात्रों से पीछे रहती हैं और यह अंतर तीसरे साल तक कायम रहता है। फिजिक्स और मैथ्मेटिक्स में छात्राओं की पकड़ कम होती है, जबकि क्रिटिक्ल थिकिंग में भी वे पीछे रहती हैं।
महत्वपूर्ण बिंदू
- सर्वे रिपोर्ट में 50 नेशनल इंस्टीट्यूट (आईआईटी, एनआईटी व बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज रैंक सौ वाले) के 18 हजार छात्रों, 2626 शिक्षकों को रखा गया था।
- पिछड़े व दूरदराज के क्षेत्रों के 118 कालेजों के 27,453 छात्रों और 4252 शिक्षकों को इसमें शामिल किया गया था। कुल 301 विभागाध्यक्ष भी सर्वे में शामिल हुए।