उन्होंने कहा कि आंकड़ों पर जाएं तो इस साल के जून तक आरओसी ने उल्लंघनकर्ता 10875 कंपनियों के खिलाफ अभियोग शुरू किया है। 2015.16 में 1830ए 2016.17 में 4522ए 2017.18 में 4124 और मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही तक 399 मामलों में अभियोग शुरू किया गया।
यही नहीं, 83 कंपनियों के खिलाफ इस दौरान जांच शुरू की गई। जबकि पिछले चार साल में सघन जांच के दायरे में 207 कंपनियां आई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारी हरेक कंपनी पर नजर हैए नोटबंदी के दौरान 11 लाख ऐसी कंपनियां थी जिन्होंने बैंक में रकम जमा कराई। उनके खिलाफ भी छानबीन चल रही है।
चौधरी ने कहा कि सवा तीन लाख के करीब मुखौटा कंपनियों और उनके पदाधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की गई है। पूरी व्यवस्था को स्वच्छ रखने के लिए कानून भी लाए गए। यह सरकार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट करते हैं। यह भ्रष्टाचार की जड़ है जिसे खत्म करने के लिए सरकार ने विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की है।
रहा सवाल विदेशों में जमा कालेधन को वापस लाने का तो सौ से भी ज्यादा द्विपक्षीय समझौते और करार किए गए हैंए जिनका फायदा आने वाले दिनों में स्पष्ट तौर पर दिखाई देगा। मंत्री ने कहा कि सरकार का इरादा किसी को परेशान करने का नहींए बल्कि प्रभावी अनुपालन कराना है।
कालेधन से बेनामी संपत्ति अर्जित करने वालोंए कालेधन को सफेद करने वालों और अघोषित आय के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का अभियान जारी है। आज कोई भी कालेधन के खिलाफ शिकायत करता है या सूचना देता है तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जाताए बल्कि तत्काल कदम उठाया जाता है।
गौरतलब है कि हाल ही में आयकर विभाग को तमाम देशों से कालेधन से जुड़ी सूचनाएं मिली हैं। इन सूचनाओं के आधार पर करीब 500 लोगों को नोटिस भी भेजा गया है। हालांकि इस पर आधिकारिक तौर पर अभी तक कोई खुलासा सरकार की ओर से नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि विदेशों में जमा कालेधन की जानकारी से संबंधित खुलासा आने वाले लोकसा चुनाव के दौर में किया जाएगा।