कोरोना संक्रमित या रिकवर होने वालों में फंगस का संक्रमण भी देखने को मिल रहा है। ऐसे मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं जिसके चलते बाजार में इसकी दवा कोलेकर भारी कमी देखने को मिल रही है। इसीलिए सरकार ने मंगलवार को एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसका इस्तेमाल म्यूकोर्मिकोसिस या ब्लैक फंगस संक्रमण के इलाज के लिए किया जाता है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार इंजेक्शन के निर्यात को प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि एक निर्यातक को अपनी निर्यात खेप के लिए निदेशालय से विशेष अनुमति या लाइसेंस लेना जरूरी है। डीजीएफटी ने कहा कि एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन का निर्यात तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित है।
एली लिली की कॉकटेल दवा को मिली मंजूरी
कोरोना वायरस के उपचार में कॉकटेल दवा के इस्तेमाल को लेकर अब एली लिली एंड कंपनी को भी आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति मिल चुकी है। मंगलवार को कंपनी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल ने कॉकटेल दवा के इस्तेमाल की अनुमति दी है। यह एंटीबॉडी दवा भारत में हल्के से मध्यम कोरोना रोगियों को दी जाएगी।
एली लिली कंपनी ने एक बयान जारी करते हुए बताया कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी बामलानिविमैब और एटेसेविमैब के मिश्रण से कॉकटेल दवा को तैयार किया है जिसे व्यस्क रोगियों को दिया जाएगा। दरअसल, मोनोक्लोनल एंटीबॉडी प्राकृतिक एंटीबॉडी की नकल करते हैं जो शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए उत्पन्न करता है। कंपनी के अनुसार वह भारत सरकार और नियामक अधिकारियों के साथ बातचीत कर रही है। इन दवाओं को दान में दिया जा सकता है।
रूस से भारत पहुंची स्पूतनिक-वी की 30 लाख खुराक
रूस की स्पूतनिक-वी कोरोना टीके की 30 लाख खुराक वाली भारत पहुंची। आधिकारिक बयान में कहा गया, डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज ने भारत में स्पूतनिक-वी की 25.0 करोड़ शीशियों को बेचने के लिए रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष के साथ एक समझौता किया है। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज को स्पूतनिक-वी के प्रतिबंधित आपातकालीन उपयोग के लिए भारतीय दवा नियामक से मंजूरी मिल गई है।
18 साल से कम उम्र वालों पर न हो 2डीजी का इस्तेमाल : डीआरडीओ
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मंगलवार को कहा कि उसके द्वारा विकसित कोरोना की दवा 2-डीजी के इस्तेमाल को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए। कोविड-19 के मरीजों को डॉक्टरों की देखरेख और प्रिस्क्रिप्शन के तहत ही यह दवा दी जाए। इस दवा का इस्तेमाल कोरोना के मध्यम रूप से संक्रमित मरीजों पर अधिकतम दस दिनों के लिए किया जाना चाहिए।
डीआरडीओ ने स्पष्ट किया है कि अनियंत्रित ब्लड शुगर, हृदय की बीमारी, एआरडीएस, लिवर और किडनी के रोगियों पर इस दवा का परीक्षण नहीं हुआ है, ऐसे में इन रोगियों को फिलहाल 2-डीजी दवा नहीं दी जानी चाहिए। इसके अलावा गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं और 18 साल से कम आयु के लोगों के लिए भी इस दवा के इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।