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सपा का ग्राफ गिरने से भाजपा चिंतित, मुलायम के भावी रुख पर नजरें

Mon, 24 Oct 2016 04:27 AM IST
हिमांशु मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पूर्व सपा के दो फाड़ हो जाने के साफ संदेश ने सभी दलों के समीकरण बदल दिए हैं। विशेष सियासी रणनीति के तहत सपा से ही मुख्य मुकाबला होने की लगातार घोषणा करने वाली भाजपा रविवार को सपा में चरम पर पहुंची उठापटक के बाद सतर्क हो गई है। पार्टी की निगाहें फिलहाल सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भावी रुख पर है। पार्टी मान रही है कि इस उठापटक के बाद उसे चुनाव के लिए नए सिरे से रणनीति बनानी होगी। रणनीति किस तरह की होगी यह इस पर निर्भर करेगा कि मुलायम परिवार का झगड़े का ऊंट आखिरकार किसी करवट बैठता है।
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पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक फिलहाल मुलायम परिवार का झगड़ा भविष्य में क्या रूप लेगा इसे भांपना बेहद कठिन है। फिलहाल जो दिख रहा है उसमें एक संभावना सभी पक्षों को साधने केलिए सरकार की कमान खुद मुलायम द्वारा संभाल लेने की भी है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो दूसरी संभावना सपा में टूट की है। टूट होती है तो निश्चित रूप से सपा को भारी नुकसान तो होगा। मगर मुश्किल यह है कि राज्य में यह धारणा बन सकती है कि विधानसभा की लड़ाई में सपा कहीं नहीं है। सपा के रेस से बाहर होने की धारणा दलितों के अलावा मुसलमानों को बसपा के पक्ष में एकजुट कर सकती है। इसके उलट अगर मुलायम ने खुद सत्ता की कमान संभाली तो पहले यह समझना होगा कि इसका सियासी संदेश राज्य में क्या जाएगा। जाहिर तौर पर दोनों ही परिस्थितियों में भाजपा को अपनी चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव करना होगा। सबसे बड़ा बदलाव तो यह करना होगा कि उसे सपा के इतर अपना ज्यादा ध्यान बसपा पर केंद्रित करना होगा।
 
हालांकि पार्टी आधिकारिक तौर पर टूट की स्थिति में मुलायम परिवार के किसी सदस्य को अपने खेमे में लेने का विरोध कर रही है, जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि पार्टी इस मामले में फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोल रही। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक जब तक इस झगड़े को ठोस परिणाम सामने नहीं आएगा, तब तक पार्टी के लिए कुछ भी फैसला करना कठिन है। पार्टी मुलायम परिवार में चल रहे शह और मात के दांव में अंतिम घड़ी आने का इंतजार कर रही है। जाहिर तौर पर पार्टी यह भांपना चाहती है कि आखिर इस लड़ाई में मात किसे मिली।
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