तृणमूल कांग्रेस में दोबारा शामिल होने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव परिणाम सामने आने के बाद हुई हिंसा में जब भाजपा कार्यकर्ता मारे जा रहे थे तब पार्टी का कोई बड़ा नेता बचाने नहीं आया था। इसलिए हमने तृणमूल कांग्रेस में वापस लौटने का फैसला किया है। इन कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब पार्टी हमारी सुरक्षा ही नहीं कर सकती तो पार्टी में रहने का क्या मतलब बनता है।
छोटे-छोटे कार्यकर्ताओं की तृणमूल में वापसी के साथ ऐसे कुछ बड़े नाम भी चर्चा हैं जिनके बारे में कयास लगाए जा रहे हैं कि वह भाजपा का साथ छोड़ फिर ममता बनर्जी की शरण में आ सकते हैं। एक समय में ममता बनर्जी की करीबी रहीं सोनाली गुहा भी चुनाव से पहले टीएमसी छोड़ भाजपा में चली गई थीं। लेकिन बीते दिनों उन्होंने भी फिर तृणमूल के खेमे में लौटने की इच्छा जताई थी।
राजीव बनर्जी के बारे में भी कहा जा रहा है कि वह तृणमूल में आ सकते हैं। हाल ही में किया गया उनका एक ट्वीट भी ऐसा ही संकेत देता है। इसमें उन्होंने भाजपा का विरोध और तृणमूल का समर्थन किया था। वहीं, तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी दावा कर चुके हैं कि तृणमूल से भाजपा में गए कई लोग तो वापसी के इच्छुक हैं ही भाजपा के कई विधायक भी उनके संपर्क में हैं।
हावड़ा के दोमजुर में बुधवार को जगह-जगह पोस्टर लगाए गए जिनमें कहा गया है कि ‘जिन्होंने ममता बनर्जी को धोखा दिया, उनके लिए बंगाल में कोई स्थान नहीं है।’ फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ कि ये पोस्टर किसने लगाए। एक पोस्टर में लिखा गया है , ‘(गद्दार) मीर जाफर को दोमजुर में वापस नहीं आने दिया जाएगा।’ इसमें यह भी दावा किया है कि तृणमूल कार्यकर्ताओं की ओर यह पोस्टर लगाया गया है।