भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में जीत की शुरुआत ऐसी सीट से की है जिसके बारे में किसी को अंदेशा नहीं था। यूपी में भाजपा ने जीत का खाता देवबंद सीट से खोला है। जिसपर हमेशा से हार-जीत का निर्णय मुस्लिम समुदाय के लोग करते थे। वहां भाजपा की जीत को किसी करिश्मे से कम नहीं माना जा रहा है।
भाजपा ने जिस तरह तीन तलाक और समान नागरिक संहिता के मुद्दे को हवा दी थी। उससे ऐसा लग रहा था कि एक बार फिर मुस्लिम वोटर भाजपा के खिलाफ टैक्टिकल वोटिंग करेगा। यह बात उस वक्त और पुख्ता हो गई जब भाजपा ने मुस्लिम उम्मीदवारों की अनदेखी की और एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को चुनावी मैदान में नहीं उतारा।
बावजूद इसके देवबंद सीट पर भाजपा के भाजपा के बृजेश ने बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार माजिद अली को मात दी। सपा का उम्मीदवार मावी अली तीसरे पायदान पर रहे। भाजपा देवबंद में इतनी मजबूती के साथ उबरी कि दूसरे और तीसरे पायदान पर काबिज उम्मीदवारों के कुल वोट भी भाजपा उम्मीदवार से कम रहे। इसके अलावा इस सीट पर दावेदारी पेश कर रहे बाकी उम्मीदवार अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। देवबंद में भाजपा उम्मीदवार को 73559 वोट मिले। बसपा उम्मीदवार को 43528 और सपा उम्मीदवार को 27150 वोट हासिल हुए।
साल 2012 में सपा उम्मीदवार राजेंद्र राणा को जीत हासिल हुई थी। उनके देहांत के बाद इस सीट पर हुए उपचुनाव सपा उम्मीदवार मावी अली को जीत मिली थी। इस बार मोदी लहर में मावी अली को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।
कांग्रेस के इमरान मसूद के प्रभाव वाली इस सीट पर भाजपा का जीत हासिल को एक बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा सकता है। अब मुसलमानों को भाजपा से परहेज नहीं रह गया है।