भाजपा को एनआरसी के मुद्दे पर असम में भले ही मुश्किलें झेलनी पड़ रही हो, लेकिन दूसरे राज्यों में पार्टी इसे चुनावी दांव बनाने से नहीं चूकना चाहती। इस साल हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा अपने घोषणा पत्र में एनआरसी लागू करने का वादा करेगी। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल पहले ही एनआरसी लागू करने की बात कह चुके हैं।
अगले साल दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों के भाजपा एनआरसी को बड़ा मुद्दा बनाएगी। दिल्ली में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठियों की मौजूदगी का दावा किया जाता है। पार्टी यहां भी एनआरसी लागू करने का वादा घोषणा पत्र मेें करेगी। इसके बाद पार्टी की योजना वर्ष 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस मुद्दे को भुनाने की है।
हालांकि असम में एनआरसी प्रकाशित होने के बाद पार्टी वहां असहज महसूस कर रही है। जिन नागरिकों ने एनआरसी में जगह पाने में नाकामी हासिल की है, उसमें हिंदुओं की संख्या मुसलमानों से ज्यादा है। इस कारण राज्य में फैली नाराजगी को दूर करने के लिए भाजपा नेतृत्व ने संसद के शीतकालीन सत्र में नागरिकता संशोधन बिल को पारित कराने की योजना बनाई है। इस बिल के कानूनी जामा पहनते ही बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के हिंदू शरणार्थियों को बिना शर्त देश की नागरिकता मिल जाएगी।