भाजपा अगले साल होने वाला लोकसभा चुनाव पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में ही लड़ेगी। लोकसभा चुनाव, 2019 के मद्देनजर पार्टी ने अगले साल जनवरी में खत्म हो रहे उनके कार्यकाल को एक साल के लिए बढ़ा दिया है। पार्टी ने अगले एक साल तक हर तरह के संगठनात्मक चुनावों को भी टाल दिया है।
शनिवार को शुरू हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में एक प्रस्ताव के जरिये शाह का कार्यकाल बढ़ाने और संगठनात्मक चुनाव टालने पर सहमति बनी। वैसे भी भाजपा में चुनाव से पहले बड़े स्तर पर बदलाव नहीं होता। शाह के पहले भी कई नेताओं का कार्यकाल बढ़ाया गया है। शाह के नेतृत्व में पार्टी ने 19 राज्यों में जीत हासिल की है। ऐसे में उनका कार्यकाल बढ़ाने को लेकर कोई संदेह भी नहीं था।
अटल-आडवाणी की जोड़ी ने भाजपा को बनाया अजेय : शाह
शाह ने भाजपा की प्रगति और वर्तमान में अजेय की छवि बनाने का श्रेय पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के साथ वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी को दिया है। उन्होंने कहा कि स्थापना के बाद महज दो सीटें जीतने वाली भाजपा अगर वर्तमान में 19 राज्यों और देश के 70 फीसदी भूभाग पर काबिज है तो इसका सारा श्रेय वाजपेयी और आडवाणी को जाता है। अटल-आडवाणी की सियासी जोड़ी के प्रयास से पार्टी पहली बार केंद्र की सत्ता पर काबिज हुई। इसके बाद पार्टी का काफिला बढ़ता चला गया। वाजपेयी की उपलब्धियों और व्यक्तित्व पर कहने के लिए शब्द नहीं हैं।
मनमोहन फालोवर तो मोदी नेतृत्वकर्ता
शाह ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की पीएम नरेंद्र मोदी से तुलना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में रहते मनमोहन पार्टी को फालो करते हैं, वहीं भाजपा में पीएम मोदी नेतृत्व करते हैं। पीएम ने देश को बताया कि गरीब के बेटे के सत्ता में पहुंचने पर कैसे सैकड़ों योजनाएं इन्हीं वर्गों के हित में बनाई और कुशलता से जमीन पर उतारी जाती हैं।