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छवि युद्ध में राहुल गांधी से मोदी का सीधा मुकाबला कराएगी भाजपा

Mon, 28 May 2018 09:44 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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(फाइल फोटो)
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की लोकप्रियता में चाहे जितना सुधार हो रहा हो, लेकिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को इसकी कोई चिंता नहीं है। भाजपा अध्यक्ष को पता है कि 2019 में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि के आगे राहुल गांधी कहीं भी टिकने वाले नहीं है। इतना ही नहीं पूरे विपक्ष के पास प्रधानमंत्री मोदी के समानांतर खड़ा होने वाला चेहरा नहीं है। शाह के इस आत्मविश्वास से साफ है कि भाजपा आम चुनाव 2019 को छवि युद्ध की बिना पर लड़ने की योजना बना रही है।
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हिंदुत्व, विकास और मोदी

राहुल गांधी के मंदिर-मंदिर जाने से उनका हिंदुत्व का एजेंडा रेंग भी नहीं पा रहा है। यह हम नहीं भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का आकलन है। उसका मानना है कि मंदिर-मंदिर जाकर दर्शन करने से यदि हिन्दू अपनी समझ बनाता तो कर्नाटक में भाजपा को 104 सीट मिलने की मंजिल काफी दूर होती। इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष चाहे जितना माथा टेके, उनका इतिहास उनकी छवि को नहीं बदल पाएगा।

सूत्र बताते हैं कि इसे केन्द्र में रखकर भाजपा का हिंदुत्व का एजेंडा उसकी पुरानी पहचान के आधार पर छिपे रूप में आगे बढ़ेगा। पार्टी की शेष उम्मीद उच्चतम न्यायालय के राम मंदिर मुद्दे पर आने वाले फैसले पर टिकी है। रणनीतिकारों को उम्मीद है कि फैसला चाहे जो आए, इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदलेंगे।
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चार साल पूरे होने पर भाजपा अध्यक्ष ने मोदी राज के कामकाज गिनाए हैं। एनपीए से लेकर हर खराब स्थिति का ठीकरा कांग्रेस पर फोड़ा है। साथ में अमित शाह ने खुला ऐलान किया है कि आने वाले समय में विरोधी झूठ, जोर से झूठ फैलाने और सार्वजनिक तौर पर झूठ फैलाने की राजनीति को हवा देंगे।

उनका इशारा मोदी सरकार के समय में हुए विकास कार्यों की तरफ झुठलाने की तरफ था। माना जा रहा है कि यह अमित शाह की रणनीति है। आगे भाजपा मोदी सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त शासन और विकास को प्रचारित करने तथा कांग्रेस और अन्य विरोधियों के झूठा प्रचार करने, प्रोपेगैंडा फैलाने और मोदी को सत्ता से हटाने के लिए एकजुट होने को प्रचार का आधार बनाएगी।

पार्टी की रणनीति में अंतिम हथियार प्रधानमंत्री मोदी की छवि ही है। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री दुनिया के सबसे लोकप्रिय शासनाध्यक्ष हैं। वह 16-18 घंटे काम करने वाले परिश्रमी प्रधानमंत्री हैं। वह साफ कहते हैं कि लोकसभा चुनाव में क्षेत्रीय मुद्दे और चेहरे नहीं, बल्कि राष्ट्रीय छवि का महत्व रहेगा। इसलिए उन्हें नहीं लगता कि प्रधानमंत्री मोदी के सामने विपक्ष चाहे जितना एकजुट हो ले, लेकिन कोई गुल नहीं खिला पाएगा। शाह की इस सोच के पीछे प्रधानमंत्री मोदी की हिंदुत्व को लेकर बनी छवि भी है।
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अक्षम

Rahul Gandhi
राजनीति में खुद की जीत तय करने के दो रास्ते होते हैं। पहली खुद की लाइन बड़ी कर ली जाए और दूसरा रास्ते सामने वाले की लाइन को कुछ छोटी करने का है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के हमले का अंदाज दोनों ही रास्तों को अजमाने का संकेत दे रहा है। प्रधानमंत्री पद की गरिमा गिराने के सवाल पर वह तपाक से कहते हैं कि हमारे प्रधानमंत्री को किसी से पूछकर निर्णय नहीं लेना पड़ता। वह अपने निर्णय खुद लेने में सक्षम है। 

इसके बाद भाजपा अध्यक्ष हमलावर होकर राहुल गांधी द्वारा यूपीए सरकार के समय में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा भूमि अधिग्रहण पर लाए आध्यादेश को फाड़ने का जिक्र देते हैं। दरअसल शाह इस माध्यम से जहां राहुल गांधी की समझ पर हमला कर रहे हैं, वहीं वह मनमोहन सिंह को कठपुतली सरकार का मुखिया भी बता रहे हैं।

राहुल गांधी पर ओछी टिप्पणी नहीं

यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी को लेकर अनानस के जूस को नारियल जूस बताने या फिर कुछ लोगों की उम्र बढ़ जाती है, लेकिन उनकी बुद्धि नहीं बढ़ती जैसी टिप्पणी से सार्वजनिक मंच पर भाजपा तौबा कर सकती है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने काफी हद तक अपनी रणनीति में इसका ख्याल रखा था। समझा जा रहा है कि इस साल के अंत में प्रस्तावित राजस्थान, मध्सप्रदेश, छत्तीसगढ़ के चुनाव में भी पार्टी इससे परहेज कर सकती है। 

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी काफी संभलकर राजनीति की पारी खेल रहे हैं। पार्टी के सूत्रों को भी अनुमान है कि लोकसभा चुनाव तक भाजपा राहुल गांधी और अन्य विरोधियों पर नीतिगत, नैतिकता आधारित राजनीतिक बयानबाजी को मुख्य आधार बनाएगी।
 
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