प्रधानमंत्री के भाषणों में पाकिस्तान और सेना का बार-बार जिक्र करने का बचाव करते हुए गडकरी ने कहा, "दरअसल हाल ही में पाकिस्तान की आतंकवादी गतिविधियों का जवाब भारत को देना पड़ा। ये विषय जब सामने आये तो आंतरिक और बाह्य सुरक्षा से जुड़े इस विषय पर चर्चा होना स्वाभाविक है। इसलिये राष्ट्रवाद को हमने मुद्दा नहीं बनाया है, बल्कि मीडिया ने बालाकोट सैन्य कार्रवाई पर उठे सवालों को चर्चा में लाकर इसे मुद्दा बना दिया।’’
पांच साल में सरकार की उपलब्धियों के सवाल पर गडकरी ने कहा कि मोदी सरकार ने देशहित में राष्ट्रीय राजमार्ग, हवाईअड्डे, अंतरदेशीय जलमार्ग जैसी बड़ी-बड़ी योजनायें शुरु कीं। इससे बहुत बड़ा बदलाव दिखा। साथ ही उज्ज्वला योजना से लेकर जनधन, मुद्रा और आयुष्मान योजना तक और फसल बीमा से लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना तक सभी के बहुत अच्छे परिणाम देखने को मिले।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि जितने काम 50 साल में नहीं हुये थे, वे काम पांच साल में होते देख, जनता ने एक मजबूत विकल्प के रूप में इस बार भी हमें चुनने का फैसला कर लिया है।’’ यह पूछे जाने पर कि सरकार की उपलब्धियों का जिक्र होने पर सिर्फ उनके मंत्रालय (सड़क परिवहन, जहाजरानी एवं गंगा) के कामों की ही चर्चा होती है, उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है, सभी मंत्रालयों में काम हुआ है। उन्होंने कहा, "मुझे लाभ जरूर मिलता है कि क्योंकि मेरे विभागों के काम दिखते हैं।"
यह पूछे जाने पर कि रोजगार में तेजी से आयी गिरावट और आर्थिक मंदी की हकीकत से क्या सरकार चिंतित नहीं है, गडकरी ने कहा, ‘‘अकेले मेरे विभाग में 17 लाख करोड़ रुपये के काम हुये। इनमें 11.5 लाख करोड़ रुपये के काम सड़कों के हुए हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘देश के कुल सीमेंट उत्पादन का 40 प्रतिशत सीमेंट वह (सरकार) खरीदते हैं तो इससे कहीं न कहीं रोजगार तो सृजित हुआ ही है।’’ उन्होंने दलील दी कि सभी बंदरगाह लाभ की स्थिति में हैं और नौवहन से कारोबार शुरु होने से भाड़े की लागत कम होगी।
गडकरी ने कहा कि जब लागत कम हो रही हो, रोजगार पैदा हो रहे हों तो मंदी की बात कहां है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके अलावा वैश्विक मंदी का भी तकाजा होता है और यह विश्व बाजार में उतार चढ़ाव (चक्र) की एक सामान्य प्रक्रिया का परिणाम होता है।
यह पूछे जाने पर कि पुलवामा हमले में खुफिया तंत्र की नाकामी को लेकर व्याप्त भ्रम की स्थिति अब भी बरकरार है और क्या इस बारे में किसी की जिम्मेदारी तय करने के लिए सरकार में कभी कोई चर्चा हुयी, गडकरी ने कहा, "किसी भी देश में आतंकवादी घटनाओं को खुफिया तंत्र की विफलता के नजरिये से नहीं देखा जाता है। यह लंबी लड़ाई है। अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस सहित तमाम देशों में आतंकवादी घटनायें हुयीं। उन्हें खुफिया तंत्र की विफलता कहना आसान है। खुफिया संगठनों में भी दैवीय व्यवस्था नहीं बल्कि मानवीय व्यवस्था कायम है। इसलिये मुझे लगता है कि यह खुफिया विफलता का मामला नहीं है। जहां तक सरकार में इस पर चर्चा का सवाल है तो ऐसे मुद्दे गोपनीय होते हैं।"
यह कहे जाने पर कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भाजपा को चुनौती दी है कि वह नोटबंदी एवं जीएसटी जैसे फैसलों पर चुनाव लड़े और क्या वह मानते हैं कि यह बड़ी उपलब्धियां नहीं है, गडकरी ने जवाब दिया, "कालेधन के खिलाफ जो बड़े फैसले किये गये, नोटबंदी उनमें से एक था। सच्चाई यह है कि इससे अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता आयी है। विदेशों में पैसा जमा करने वाली बात भी इससे खत्म हुयी है।" उन्होंने कहा, ‘‘जीएसटी भी स्वाधीनता के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार है और नोटबंदी ने काले धन पर नकेल कसी है।’’
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "हम अपने सभी प्रमुख फैसलों का जिक्र करते हैं। कुछ नीतियां ऐसी होती है जिसके परिणाम लंबे समय के बाद मिलते हैं। इन विषयों पर जनता भी चर्चा कर रही है और जनता को ही फैसला भी करना है।" यह कहे जाने पर कि कई जानकार लोग मान रहे हैं कि चुनावों में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने वाला है, गडकरी ने कहा, ‘‘भाजपा को पिछले चुनाव से ज्यादा सीट मिलेंगी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगियों की सीटें भी बढ़ेंगी, जिसके बलबूते भाजपा सरकार बनायेगी।’’