मौजूदा कानून में मुख्य सूचना आयुक्त को पांच साल के लिए (या 65 वर्ष तक की आयु का होने तक) नियुक्त किया जाता है। उसका वेतनमान चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त के बराबर होता है।
कथित रूप से सरकार मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के बाद केंद्र सरकार की सहमति तक बने रहने का प्रावधान करना चाहती है। इसके अलावा सरकार चुनाव आयुक्तों का वेतनमान भी चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त से अलग तय करने का कोई मानक बनाना चाहती है।
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 कांग्रेस की बड़ी उपलब्धि
यूपीए के कार्यकाल में जो भी कानून लाए गए थे, उनमें सूचना का अधिकार कानून बेहद अहम माना जाता है। इससे पहली बार देश के आम नागरिक को सरकार की योजनाओं और उससे जुड़ी सूचनाओं को पाने का अधिकार दिया गया। माना जाता है कि इस कानून ने देश में कई घोटालों और व्यवस्था की अनियमितता को सामने लाने का काम किया है।
बीते बुधवार को ही एक आरटीआई कार्यकर्ता ने एक जानकारी सार्वजनिक कर सरकार को बैकफुट पर ला दिया। जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गोद लिए आदर्श ग्राम में सांसद निधि से एक भी रुपया खर्च नहीं किया।