कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा, देश के पीएम के पास हर चीज के लिए समय है, लेकिन उन्हें संवेदनशील हालात से जूझ रहे पूर्वोत्तर भारतीय प्रदेश मणिपुर जाने का समय नहीं मिल रहा है।
कांग्रेस ने मणिपुर मुद्दे पर फिर आक्रामक तेवर अपनाए हैं। रविवार को कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे को नाटक बताते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधा।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राज्य की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया। रमेश ने कहा कि एक साल से अधिक वक्त बीत चुका है, लेकिन प्रधानमंत्री को हिंसा प्रभावित मणिपुर का दौरा करने का 'अभी तक समय नहीं मिला' है।
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जयराम रमेश ने पिछले साल मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे को लेकर हुए 'नाटक' की याद दिलाई और आधिकारिक एक्स हैंडल पर फटे हुए त्यागपत्र की तस्वीर साझा की। रमेश ने कहा, '‘ठीक एक साल पहले, इंफाल में इस्तीफे का एक बड़ा नाटक हुआ था।'
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कांग्रेस महासचिव ने कहा, मणिपुर की पीड़ा और व्यथा जारी है। 'नॉन बायोलॉजिकल' प्रधानमंत्री के पास संकट से जूझ रहे राज्य मणिपुर का दौरा करने का समय नहीं। यहां तक कि पीएम मोदी मणिपुर के विधायकों से भी आमने-सामने आकर बात करने से कतरा रहे हैं। उनके पास मणिपुर के अलावा हर चीज के लिए समय है। बता दें कि एक इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कहा था कि मां हीराबेन के निधन के बाद वे खुद को बायोलॉजिकल नहीं मानते। ऐसा लगता है कि भगवान उनसे कुछ खास कराना चाहता है।
गौरतलब है कि पिछले साल मई में मणिपुर में व्यापक हिंसा हुई थी। मैती समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने से जुड़े विवाद के बाद जातीय हिंसा भड़क उठी थी। अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में कुकी आदिवासियों ने एकजुटता मार्च निकाला था। पहाड़ी जिलों में एकजुटता मार्च के बाद मणिपुर में हुई जातीय हिंसा के कारण 200 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। 1500 से अधिक लोग घायल हुए थे, जबकि 60 हजार लोग विस्थापित हुए थे।
हिंसक घटनाओं के बाद कठघरे में आई राज्य सरकार के मुखिया बीरेन सिंह ने पिछले साल जून में इस्तीफे की पेशकश की थी। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के बढ़ते दबाव के बीच गृह मंत्री शाह ने खुद प्रदेश का दौरा किया था। इसके बाद उन्होंने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया था। बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का प्रयास किया था, लेकिन उनके समर्थकों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया था। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक सैकड़ों महिलाओं ने मानव श्रृंखला बनाकर उन्हें राजभवन जाकर इस्तीफा देने से रोक दिया था। महिलाओं ने त्यागपत्र फाड़ भी दिया था।