भाजपा में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से जुड़ी किताब को लेकर सियासी हलचल शुरू हो गई है। दरअसल, 32 साल तक आडवाणी के सहायक रहे विश्वंभर श्रीवास्तव शुक्रवार को ‘आडवाणी के साथ 32 साल’ पुस्तक लेकर आ रहे हैं जिसे लेकर वरिष्ठ नेता खासे नाराज बताए जा रहे हैं। भाजपा के शीर्ष नेता की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह किताब बगैर उनकी सहमति के प्रकाशित की गई है।
खास बात यह है कि पुस्तक का लोकार्पण भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी कर रहे हैं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता की जिम्मेदारी पार्टी के एक अन्य सांसद आरके सिन्हा को दी गई है।
आडवाणी की इच्छा के विरुद्ध लिखी गई इस किताब को लेकर पार्टी में कई तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि अभी तक मीडिया में पुस्तक से संबंधित जो दो अंश सार्वजनिक हुए हैं, उनमें लेखक ने आडवाणी की तारीफ ही की है।
अमूमन राजनेताओं से जुड़ी पुस्तकों के लोकार्पण से पहले ही चर्चा में आने का दस्तूर श्रीवास्तव की पुस्तक को लेकर भी कायम है। अनिल प्रकाशन की इस पुस्तक को लेकरकरीब एक महीने से चर्चा थी। इसी बीच, आडवाणी ने पुस्तक के प्रकाशन पर नाराजगी जता कर चर्चाओं का बाजार और गर्म कर दिया है।
बृहस्पतिवार को जारी बयान में आडवाणी के वर्तमान सचिव दीपक चोपड़ा ने कहा है कि हमारी जानकारी के बगैर विश्वंभर श्रीवास्तव ने आडवाणी के साथ 32 साल नामक पुस्तक लिखी है, जिसका लोकार्पण शुक्रवार को होना है। पुस्तक आडवाणी की सहमति के विरुद्ध लिखी गई है। इस बयान के बाद से ही सियासी गलियारे में पुस्तक को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं।