पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम भले ही भाजपा की उम्मीदों के अनुरूप न रहे हों, लेकिन इसने योगी आदित्यनाथ को भाजपा के दूसरे सबसे ज्यादा स्वीकार्य चेहरे के रूप में स्थापित कर दिया। दरअसल इन चुनावों में योगी आदित्यनाथ की रैलियों की सभी राज्यों में खूब डिमांड रही। उन्होंने इन चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी ज्यादा रैलियों और चुनावी सभाओं को सम्बोधित किया। वे जहां भी चुनाव प्रचार के लिए गए, लोगों का हुजूम उन्हें देखने-सुनने के लिए उमड़ पड़ा।
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने तो उनका चरण स्पर्श कर अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की जो उनके धार्मिक-राजनीतिक महत्त्व को दिखाता है। हालांकि ये अलग बात रही कि उनके आशीर्वाद से भी रमन सिंह को चौथी बार छत्तीसगढ़ की सत्ता हासिल नहीं हो सकी। तेलंगाना जैसे राज्य में भी पार्टी ने अपना जनाधार बढ़ाने के लिए सबसे ज्यादा उन्हीं पर विश्वास किया जहां उन्होंने 8 बड़ी सभाओं के साथ कई रैलियों को सम्बोधित किया।
अपनी कट्टर हिंदूवादी छवि के कारण योगी आदित्यनाथ हमेशा से भाजपा के जाने-पहचाने नेताओं में रहे। उत्तर प्रदेश का कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने कुछ ऐसे फैसले भी लिए जिसने उनकी उस छवि को मजबूती के साथ स्थापित किया।
गोकशी रोकने, कुछ शहरों के नाम बदलने से लेकर अपराधियों का ताबड़तोड़ एनकाउंटर कर योगी आदित्यनाथ ने खुद को जनता के बीच एक स्टार के रूप में स्थापित कर दिया। संगठन उनकी इसी छवि को भुनाना चाहता था जिसके कारण उन्हें पूरे चुनाव के दौरान फ्रंट पर रखा। जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सबसे ज्यादा छत्तीसगढ़ में 14 बड़ी रैलियों को सम्बोधित किया। इसके अलावा मध्यप्रदेश-राजस्थान में 11-11 बड़ी रैलियां और तेलंगाना में 8 रैलियों के साथ कुल 72 छोटी-बड़ी जनसभाओं को सम्बोधित किया।