सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा संस्थानों में दाखिलों और सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 फीसदी आरक्षण के प्रावधान को बरकरार रखा है। इससे संबंधित 103वें संविधान संशोधन विधेयक को शीर्ष कोर्ट ने दो के मुकाबले तीन मतों के बहुमत से वैध ठहराया।
#WATCH | Cong leader Udit Raj says,"Not opposing EWS reservation but I challenge the upper caste mindset of SC.When it came to expand limit of 50% reservation for SC/ST/OBC,they cited 50% limit of Indra Sawhney judgement. Today they cited Constitution that no there's no limit..." pic.twitter.com/bGSHoryrXB
सामाजिक न्याय के संघर्ष को आघात : स्टालिन
तमिलनाडु के सीएम व सत्तारूढ़ द्रमुक के नेता एमके स्टालिन ने भी फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि आज के फैसले से करीब आधी सदी से जारी सामाजिक न्याय के संघर्ष को आघात पहुंचा है।
Today's verdict in the reservation case for economically backward classes is a setback in the century-long struggle for social justice: Tamil Nadu CM MK Stalin
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कांग्रेस ने किया ईडब्ल्यूएस आरक्षण का समर्थन, जयराम रमेश बोले- मनमोहन सरकार ने की थी पहल
कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अजा-जजा व ओबीसी के अलावा अन्य वर्गों के गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण के लिए 103 वां संविधान संशोधन 2005-06 में तत्कालीन पीएम डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस नीत संप्रग सरकार द्वारा शुरू की गई पहल का नतीजा है। मनमोहन सरकार ने सिन्हो समिति गठित की थी, जिसने जुलाई 2010 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। उसके बाद व्यापक विचार विमर्श का सिलसिला शुरू हुआ और 2014 तक एक विधेयक तैयार किया गया।