West Bengal SIR Issue: मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने दावा किया कि ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से फॉर्म न भरने की बात कहकर लोगों को भ्रमित किया, जबकि उन्होंने अंतिम दिन फॉर्म जमा कर दिया।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस बयान के बाद कि वे एसआईआर के लिए फॉर्म नहीं भरेंगी, भाजपा नेता अमित मालवीय ने दावा किया कि उन्होंने अंतिम दिन अपना फॉर्म जमा कर दिया। इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप एक बार फिर बढ़ गए हैं।
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अमित मालवीय ने कहा कि ममता बनर्जी जनता को भ्रमित कर रही हैं, जबकि सच यह है कि उन्होंने 11 दिसंबर 2025 को अपना पूरा भरा और हस्ताक्षरित फॉर्म चुनाव अधिकारियों को सौंप दिया। मालवीय के मुताबिक कृष्णनगर की रैली में यह कहने के कुछ घंटों बाद ही उन्होंने अपना फॉर्म जमा कर दिया था। भाजपा नेता का दावा है कि बंगाल की जनता ने ममता की अपील को नजरअंदाज किया और बड़ी संख्या में लोगों ने समय पर एसआईआर फॉर्म भर दिए, इसलिए चुनाव आयोग को राज्य में समय सीमा बढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ी।
टीएमसी पर मालवीय का हमला
मालवीय ने कहा कि बंगाल के मतदाता अब टीएमसी की झूठ की राजनीति पर भरोसा नहीं करते और राज्य में टीएमसी सरकार का अंत करीब है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी जनता को गुमराह कर रही है, लेकिन लोग अपने अधिकारों के प्रति ज्यादा जागरूक हैं और फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया में बढ़चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
महिलाओं के अधिकार छीने जा रहे- ममता
वहीं दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर को महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई बताया। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के बहाने महिलाओं के दबे-छिपे अधिकार छीने जा रहे हैं और कई लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि महिलाएं आगे आएँ और पुरुष पीछे से उनका सहयोग करें। ममता ने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इससे आम मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है।
चुनाव आयोग ने बढ़ाई समय सीमा
इस विवाद के बीच चुनाव आयोग ने पांच राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विशेष पुनरीक्षण की अवधि बढ़ा दी है। तमिलनाडु और गुजरात में अंतिम तिथि अब 14 दिसंबर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अंडमान-निकोबार में 18 दिसंबर, जबकि उत्तर प्रदेश में यह प्रक्रिया 26 दिसंबर तक जारी रहेगी। हालांकि पश्चिम बंगाल में आयोग ने समय सीमा नहीं बढ़ाई, जिसे भाजपा अपने दावे की पुष्टि बता रही है, जबकि टीएमसी इसे राजनीतिक दबाव करार दे रही है।