संघ कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में मची तबाही के बाद पूरे देश से फीडबैक लेकर आया है। कुल मिलाकर लक्ष्य 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले होने वाले राज्यों के विधानसभा चुनाव में जनता की नाराजगी दूर करके जीत सुनिश्चित करना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और संघ नेता भी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की संगठनात्मक पकड़ का लोहा मानते हैं। भाजपा के नेता भी मानते हैं कि अमित शाह के भाजपा अध्यक्ष रहने के दौरान विषम परिस्थिति में भी पार्टी का लगातार ग्राफ बढ़ा है। इस आधार पर समझा जा रहा है कि केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ मिलकर संगठनात्मक मजबूती को धार देंगे।
हर माह उप्र का दौरा कर सकते हैं शाह
अमित शाह अब हर महीने और किसी महीने में एक से अधिक बार जेपी नड्डा के साथ अथवा अलग कार्यक्रम बनाकर उ.प्र. का दौरा करेंगे। संगठन मंत्री सुनील बंसल के साथ तालमेल बनाकर संगठनात्मक परिवर्तन, बूथ स्तर तथा पन्ना प्रमुखों को सक्रिय करके पार्टी जनता के बीच में छवि सुधारने पर काम करेगी। इसके लिए संघ के कार्यकर्ता भी सहयोग करेंगे।
मंथन का अच्छा परिणाम आएगा
इसके अलावा प्रधानमंत्री भी राज्य में दौरा कर सकते हैं। उ.प्र. से आने वाले भाजपा के एक बड़े नेता का कहना है कि हम यह नहीं कहेंगे कि कुछ नहीं हो रहा है। जो मंथन चल रहा, वह दिखाई दे रहा है। अभी केवल इतना कह सकते हैं कि इसका अच्छा परिणाम आएगा।
उ.प्र. सरकार में मंत्रियों के कई पद खाली हैं। लंबे समय से योगी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हुआ है। राज्य सरकार के मंत्री चेतन चौहान, विजय कश्यप, कमलरानी वरुण (तीन मंत्रियों) की कोरोना संक्रमण के कारण मृत्यु हो चुकी है। चार विधायकों ने भी कोरोना संक्रमण में अपनी जान गंवाई है।
छह मंत्री बनाए जा सकते हैं
मार्च 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल का पहला विस्तार 22 अगस्त 2019 को हुआ था। योगी मंत्रिमंडल में कुल 60 मंत्री हो सकते हैं। इस समय 23 कैबिनेट, 9 स्वतंत्र प्रभार, 22 राज्यमंत्री समेत कुल 54 मंत्री हैं। छह मंत्री और बनाए जा सकते हैं।
समझा जा रहा है कि जल्द ही एक मंत्रिमंडल विस्तार का निर्णय लेकर छह चेहरों को शपथ दिलाई जा सकती है। कुछ के विभाग बदल सकते हैं। यदि दो-चार चेहरे प्रदर्शन के आधार पर बाहर हुए तो कुछ नए विधायकों को अवसर मिल सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही रहेंगे।
इसके अलावा पंचम तल, मुख्यमंत्री कार्यालय और कुछ विभाग के अधिकारियों में भी फेरबदल संभव है। कुल मिलाकर मकसद पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं में उत्साह जनक संदेश देकर चुनाव की तैयारी का मानस तैयार करना रहेगा।
उ.प्र. भाजपा संगठन में भी बदलाव हो सकता है। सह संगठन मंत्री भवानी सिंह समेत कई भाजपा नेताओं को कोरोना संक्रमण में जान गंवानी पड़ी है। इन पदों पर नए चेहरों को स्थान दिया जाएगा। पूर्वी उ.प्र., मध्य तथा पश्चिमी उ.प्र. में कुछ नेताओं की जिम्मेदारी में भी फेरबदल की संभावना है।
असरदार ब्राह्मण चेहरे, जातियों को जोड़ने की जरूरत
पार्टी को उ.प्र. में विधानसभा चुनाव से पहले एक असरदार ब्राह्मण चेहरे को भी खड़ा करना है। ताकि 2022 के चुनाव में अपेक्षित परिणाम लाए जा सकें। अन्य पिछड़ा वर्ग के नेताओं की सक्रियता बढ़ानी है तथा भाजपा से छिटक रही जातियों को साथ लाने की चुनौती है। इसे ध्यान में रखकर कुछ निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।