सत्रहवीं लोकसभा के पहले ही सत्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने रिकॉर्ड तेजी से कामकाज कर सभी को चौंका दिया है। इसके लिए पार्टी की तरफ से अपनाई गई कॉरपोरेट सरीखी शैली जिम्मेदार है, जिसकी मदद से पार्टी अपने सांसदों की ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल करने में सफल हो पा रही है।
दरअसल, पार्टी ने अपने 303 सांसदों को 18 समूहों में बांटा है। हर समूह में 12 से लेकर 18 तक सदस्य रखे गए हैं। हर समूह का नेतृत्व एक तेजतर्रार सांसद को मिला है, जिसे उप सचेतक का दर्जा दिया गया है। खास बात ये है कि महिलाओं के समूह का नेतृत्व किसी महिला सांसद को ही दिया गया है।
ये 18 उप सचेतक रोज सुबह 10 बजे संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद जोशी और राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल के साथ बैठक कर उस दिन की कार्यसूची पर चर्चा करते हैं। इस बैठक में तय किया जाता है कि किस विषय पर कौन सांसद बोलेगा और किस विषय पर पार्टी की क्या रणनीति रहेगी। फिर ये उप सचेतक इस बैठक के फैसलों को अपने-अपने समूह के सदस्यों तक पहुंचाते हैं।
इस तरह 303 सांसदों वाली पार्टी का हर सदस्य अपनी जिम्मेदारी से अवगत हो जाता है। यदि किसी सांसद को छुट्टी चाहिए या किसी जरूरी काम से संसद से बाहर जाना है तो भी उसे अपने समूह के उप सचेतक से अनुमति लेनी पड़ती है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन उप सचेतकों से अभी तक सिर्फ एक-दो बार ही मिल पाए हैं, लेकिन संसद के अंदर की रणनीति तैयार करने में इन उप सचेतकों की मदद करने की जिम्मेदारी कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को दी गई है।
इनमें गृहमंत्री अमित शाह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, वन और पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर, महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण शामिल हैं। ये सभी नए सांसदों को लगातार मेहनत करने और सदन में बेहतर उपस्थिति दर्ज कराने के लिए उत्साहित करते रहते हैं।