कांग्रेस के दामन पर खून के धब्बे की बात कबूलने के बयान पर पार्टी नेता सलमान खुर्शीद चौतरफा घिरे हुए हैं। इसपर भाजपा की तरफ से बुधवार को एकबार फिर जबरदस्त प्रहार किया गया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा 'कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने उनकी पार्टी का असली चेहरा सामने रखा। वह खुद यह कबूल रहे हैं कि 'यह हाथ खून से रंगा हुआ है'। राहुल गांधी ने सभी हिंदूओं को 'भगवा आतंकवादी' करार दिया है।
उन्होंने आगे कहा 'संविधान बचाओं' कैंपेन चलाने वाले राहुल को कर्नाटक में पीएफआई के अपराधों पर जवाब देना चाहिए। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया घबराए हुए हैं इसलिए वह दो जगह से चुनाव लड़ रहे हैं। अगर उन्होंने राज्य में काम किया है तो उन्हें दो सीट से पर्चा भरने की क्या जरूरत है।'
पात्रा ने आगे कहा 'बादामी से श्रीरामुलू के चुनाव लड़ने से सिद्धारमैया परेशान हैं और यहां उन्हें निश्चित तौर पर हार का सामना करना पड़ेगा।' वहीं ध्रुवीकरण की बात पर केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि 'कर्नाटक में सिर्फ एक ही तरह का ध्रुवीकरण हो रहा है और जिसमें एक तरफ कांग्रेस है तो दूसरी तरफ राज्य की 6.5 करोड़ जनता।'
अपने दामन पर मुसलमानों के खून के धब्बे होने की बात कहकर खुर्शीद ने कांग्रेस में हड़कंप मचा दिया है। रविवार को एएमयू के डॉ. बीआर आंबेडकर हॉल में खुर्शीद ने ये बात कही और पार्टी नेताओं के कान खड़े हो गए। तो मामले पर अब कांग्रेस प्रवक्ता पीएल पुनिया ने जवाब दिया है।
पुनिया ने कहा कि 'कांग्रेस पार्टी सलमान खुर्शीद के बयान से पूरी तरह असहमत है। सभी को यह मालूम होना चाहिए कि आजादी से पहले और बाद में भी कांग्रेस ही एकमात्र ऐसी पार्टी रही है, जिसने एक समानतावादी समाज बनाने की दिशा में काम किया है। कांग्रेस ही सिर्फ एक ऐसी पार्टी है जो समाज के सभी वर्गों और लोगों को साथ लेकर चलती आई है।
एएमयू के एक निलंबित छात्र आमिर मिंटोई ने खुर्शीद से सवाल पूछा था कि 1947 में देश की आजादी के बाद हाशिमपुरा, मलियाना, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, भागलपुर, अलीगढ़, बाबरी मस्जिद आदि में मुसलमानों के नरसंहार में कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के जो इतने सारे धब्बे हैं, इनको आप किन अल्फाजों से धोना चाहेंगे?
इस सवाल के जवाब में सलमान खुर्शीद ने कहा था कि, 'कांग्रेस का नेता होने के नाते मुसलमानों के खून के यह धब्बे मेरे अपने दामन पर हैं।' इस दौरान उन्होंने छात्रों से कहा था कि वह झिझक छोड़ें और खुलकर बोलें। जिसके बाद छात्रों ने उनसे खुलकर सवाल किए थे।