मणिपुर में पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे सत्ता संघर्ष के बीच भारतीय जनता पार्टी सोमवार को सरकार बचाने में कामयाब रही। राज्य में मंत्रियों के इस्तीफे के बाद अल्पमत में आई बीजेपी सरकार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाई थी।
इसके बाद सोमवार को 60 सदस्यों वाली मणिपुर विधानसभा में वोटिंग की गई। इसमें भाजपा सरकार ने विधानसभा में ध्वनि मत से विश्वास मत जीत लिया। मतदान के दौरान सभी 28 भाजपा विधायक, और 16 कांग्रेस विधायक मौजूद थे। हालांकि कांग्रेस के आठ विधायक अनुपस्थित थे। विश्वास मत के बाद, कांग्रेस विधायकों ने विरोध जताया और सदन में कुर्सियां फेंक दीं।
विश्वास मत जीतने के बाद मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा, 'हमने ध्वनि मत से विश्वास मत जीता है। अध्यक्ष जो कुछ भी कर रहे हैं वह नियमानुसार है। विपक्षी विधायक कम संख्या में थे।'
उधर मणिपुर के पूर्व सीएम और सीएलपी नेता ओकराम इबोबी सिंह ने कहा, 'मणिपुर में कानून का शासन नहीं है। हम वोट विभाजन की मांग कर रहे हैं। वे (भाजपा) इसे पसंद नहीं करते हैं। सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर, बहुत से लोग इस सरकार को पसंद नहीं करते हैं।