पार्टी के उपाध्यक्ष अशोक सिन्हा ने कहा, भाजपा 2023 के विधानसभा चुनावों में बिना किसी नए चुनावी साथी के मैदान में उतरेगी, लेकिन आईपीएफटी के साथ गठबंधन बना रहेगा, क्योंकि भगवा पार्टी अपने किसी सहयोगी को नहीं छोड़ती है।
त्रिपुरा में आगामी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले राजनीतिक दलों का गुणा भाग शुरू हो गया है। वहीं दूसरी ओर, शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने क्षेत्रीय राजनीतिक दल टिपरा मोथा के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार किया है।
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टिपरा मोथा का नेतृत्व शाही परिवार के वंशज प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा कर रहे हैं। इस क्षेत्रीय दल ने साल 2021 के त्रिपुरा जनजाति क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद चुनाव (टीटीएएडीसी) का चुनाव जीता था। इस चुनाव में टिपरा मोथा ने भाजपा और उसके सहयोगी दल इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) को हराया था।
पार्टी के उपाध्यक्ष अशोक सिन्हा ने कहा, भाजपा 2023 के विधानसभा चुनावों में बिना किसी नए चुनावी साथी के मैदान में उतरेगी, लेकिन आईपीएफटी के साथ गठबंधन बना रहेगा, क्योंकि भगवा पार्टी अपने किसी सहयोगी को नहीं छोड़ती है।
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उन्होंने आगे कहा, हमारी चिंतन-मंथन बैठक में स्पष्ट कर दिया गया है कि भाजपा अपने बल पर राज्य में चुनाव लड़ेगी और आईपीएफटी के साथ गठबंधन जारी रहेगा। भाजपा टिपरा मोथा सहित किसी भी नए गठबंधन का समर्थन नहीं करती है। उन्होंने कहा कि भगवा पार्टी की अभी भी आदिवासी क्षेत्रों में ठोस मौजूदगी है।
सिन्हा ने यह भी दावा किया कि जनजातीय परिषद के चुनाव में आईपीएफटी के मतदाताओं ने टिपरा मोथा को वोट दिया था। उन्होंने कहा कि दो को छोड़कर भाजपा ने सभी सीटों पर जीत हासिल की। जबकि आईपीएफटी को आवंटित सभी सीटों पर टिपरा मोथा ने जीत हासिल की।
टिपरा मोथा ने 30 में 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा ने दस सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं दो सीटें राज्यपाल द्वारा मनोनीत की जाती हैं। स्वायत्त जिला परिषद, राज्य के उस दो-तिहाई हिस्से पर शासन करती है, जहां के एक तिहाई हिस्से में मुख्य रूप से आदिवासी निवास करते हैं।