भाजपा सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ ही दिनों में होने वाली अपनी बिहार यात्रा में राज्य को कई बड़ी सौगात देने वाले हैं। इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह का दौरा तय है। इस दौरे में वे एनडीए के सहयोगी दलों से बैठक कर सीटों पर तालमेल को लेकर बातचीत कर सकते हैं।
कांग्रेस-राजद की अगुवाई वाला महागठबंधन बिहार में सीटों के तालमेल और नेतृत्व के मुद्दे पर मंथन कर रहा है। लेकिन भाजपा और जदयू की अगुवाई वाले एनडीए खेमे में भी सीटों और नेतृत्व को लेकर कम घमासान नहीं है। सभी दल अपने लिए ज्यादा सीटों की दावेदारी कर रहे हैं। हम पार्टी के नेता जीतन राम मांझी ने किसी से विचार-विमर्श से पहले ही एक सीट पर अपने एक उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर भाजपा नेतृत्व को परेशान कर दिया है। ऐसे में इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में सभी घटक दलों को संतुष्ट करते हुए सीटों पर तालमेल बिठाना अमित शाह के लिए काफी पेचीदा साबित होने वाला है।
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भाजपा सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ ही दिनों में होने वाली अपनी बिहार यात्रा में राज्य को कई बड़ी सौगात देने वाले हैं। इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह का दौरा तय है। इस दौरे में वे एनडीए के सहयोगी दलों से बैठक कर सीटों पर तालमेल को लेकर बातचीत कर सकते हैं। गृह मंत्री ने अपनी पिछली यात्रा के दौरान भी पटना में सहयोगी दलों के नेताओं से बातचीत की थी।
चिराग ने उलझाया
एनडीए खेमे में सबसे बड़ी उलझन चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास पासवान) के कारण पैदा हुई है। पिछली बार चिराग पासवान ने एनडीए खेमे से अलग होकर चुनाव लड़ा था। इससे भाजपा-जदयू को पर्याप्त सीटें मिल गई थीं। 2020 में भाजपा ने 110 सीटों और जदयू ने 115 सीटों पर चुनाव लड़ा था। वीआईपी को 11 और हम को सात सीटें मिली थीं। लेकिन इस बार चिराग के साथ आने के कारण दोनों ही बड़े दलों को अपनी सीटों की संख्या से समझौता करना पड़ेगा। ऐसे में अब किसके खाते से कितनी सीटें कम होंगी, यह देखने वाली बात होगी।
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हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के नेता जीतन राम मांझी 40 सीटों पर दावेदारी कर रहे हैं। चिराग पासवान के कारण यदि सभी बड़े दलों की सीटें कम होंगी तो हम के कोटे से भी कुछ सीटों के कम होने की संभावना है। जीतन राम मांझी की 40 सीटों पर दावेदारी अपने कोटे की सीटों को बनाए रखने की कवायद ही मानी जा रही है।
'पूरी सहमति, कोई विरोध नहीं'
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला से कहा कि एनडीए खेमे में पूरी तरह सहमति है। सभी घटक दल केंद्र सरकार में भी सहयोगी हैं, इसलिए राज्य के स्तर पर भी सहमति बनी रहेगी। गठबंधन में सभी दल ज्यादा सीटों पर दावेदारी करना चाहते हैं, यह बहुत स्वाभाविक है। लेकिन जब सभी दलों के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक होगी, तब इसका हल निकाल लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एनडीए बिहार में 2025 में भी सरकार बनाने के लिए तैयार है।