शुक्रवार को हुई हरियाणा लोकसभा चुनाव देखरेख कमेटी की बैठक में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह संगठन की सुस्त रफ्तार पर अपना आपा खो बैठे। उन्होंने बैठक में शामिल नेताओं को जमकर लताड़ लगाई और कहा कि आप लोगों के साथ बैठना समय बर्बाद करना है। शाह इतने नाराज थे कि चार सत्रों की बैठक को एक सत्र में ही खत्म कर दिया। बैठक की शुरुआत संगठन की गतिविधि पर चर्चा से होनी थी। इसके बाद सीट वार सभी लोकसभा सीटों पर चर्चा, इनेलो-बसपा गठबंधन व कांग्रेस की वर्तमान राजनीतिक गतिविधि और अंत में भावी रणनीति पर चर्चा होनी थी।
इस क्रम में संगठन की गतिविधि पर चर्चा के दौरान संपर्क फॉर समर्थन अभियान और कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने के लिए वरिष्ठ नेताओं की डीसी और एसपी के साथ कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में बैठक संबंधी रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट आधी-अधूरी थी। किसी भी नेता और मंत्री ने संपर्क अभियान के तहत एक जून से 11 जून तक समाज के 25 विशिष्ट लोगों से मुलाकात नहीं की। कार्यकताओं की नाराजगी दूर करने के लिए हर जिले में एसपी और डीसी के साथ बैठक भी नहीं हो पाई।
इससे नाराज शाह ने कहा जब आप लोग एक अभियान को भी सफलतापूर्वक नहीं चला सकते तो आगे की चर्चा फिजूल है। इसके बाद शाह ने 29 जून तक हर हाल में सभी कार्य पूरा करने और 30 जून को प्रभारी महासचिव अनिल जैन के साथ बैठक करने का सख्त आदेश दिया। शाह ने कहा कि बैठक के बाद ही वह तय करेंगे कि आप लोगों के साथ मुझे बैठना है या नहीं। अगर रिपोर्ट ठीक रही तो मैं जुलाई में लोकसभा देखरेख कमेटी की फिर से बैठक बुलाऊंगा। सूत्रों के मुताबिक शाह ने किसी नेता या मंत्री द्वारा 25 विशिष्ट व्यक्तियों से मिलने का काम पूरा नहीं कर पाने पर आश्चर्य जताया।
उन्होंने कहा कि हरियाणा का पार्टी संगठन केंद्रीय नेतृत्व के अभियानों को गंभीरता से नहीं लेता। इससे पहले शाह की जींद रैली भी बुरी तरह फ्लाप रही। इसके बाद कई स्तर पर सरकार और संगठन की समीक्षा की गई। तब चर्चा थी कि शाह संगठन और सरकार में व्यापाक फेरबदल करेंगे। अब माना जा रहा है कि जुलाई में लोकसभा देखरेख कमेटी की बैठक के बाद शाह इस बदलाव को अंजाम देंगे।