जेपी नड्डा ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि एक तरफ हम ममता जी को और दूसरी तरफ बंगाल को देख रहे हैं। आज उनके नेतृत्व में बंगाल की संस्कृति भी खतरे में पड़ गई है। उन्होंने कहा कि जो बंगाल संस्कृति, विकास, देश दृष्टि और दिशा देने के लिए जाना जाता था, ऐसे बंगाल के विकास को रोकने का काम, भाई को भाई से लड़ाने का काम, बंगाल में भ्रष्टाचार फैलाने का काम, ममता सरकार ने किया है।
भाजपा जनता को साथ लेकर करेगी असली परिवर्तन
नड्डा ने कहा कि बंगाल के जागरूक लोग राज्य में परिवर्तन चाहते हैं। यह परिवर्तन यात्रा बंगाल को लोगों को जागरूक करेगी और राज्य में वास्तविक परिवर्तन आएगा।उन्होंने कहा कि भाजपा की परिवर्तन यात्रा बंगाल के घर-घर जाएगी, इलाके का दौरा करेगे, बंगाल की जनता को जागरूक करेगी और जनता को साथ लेकर बंगाल का असली परिवर्तन करेगी। हम लोग बंगाल में भाजपा की परिवर्तन यात्राओं की शुरुआत करेंगे। ये यात्राएं हम सभी को विकास की ओर ले जाने के लिए प्रेरित करते हुए जनता को जोड़ने का काम करेगी।
उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन यात्रा असल में पश्चिम बंगाल में परिवर्तन करने के लिए निकली है। यह परिवर्तन यात्रा बंगाल में ममता बनर्जी ने जिस तरह से राज चलाया है उस राज के खिलाफ परिवर्तन लाने के लिए है। बंगाल परिवर्तन चाहता है। ममता दीदी ने मां माटी मानुष की बात करती हैं लेकिन उन्होंने इसके लिए कुछ नहीं किया है।
पूछा, ममता जी आपको इतना दर्द क्यों?
नड्डा ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंंद्र मोदी के दिल में बंगाल बसा है। ममता जी आपको इतना दर्द क्यों होता है? उन्होंने कहा कि 2021 के बजट में मोदी जी ने कोलकाता से सिलिगुड़ी तक के 675 किमी हाईवे के लिए 25,000 करोड़ रुपये देना तय किया है।नड्डा ने कहा कि ममता बनर्जी को न मां की चिंता है, न माटी से प्यार है और न ही मानुष की चिंता है।उनको केवल तानाशाही से मतलब है।
तारापीठ से शुरू की परिवर्तन यात्रा
रैली को संबोधित करने के बाद नड्डा ने तारापीठ से परिवतर्न यात्रा का आगाज किया। राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी यह यात्रा निकाल रही है।
बंगाल में तानाशाही
नड्डा ने कहा कि बंगाल में तानाशाही है। ममता जी विपक्ष को दबाना चाहती हैं। उनके शासन में हमारे 130 कार्यकर्ता शहीद हो गए हैं। यह किस तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति है? महिला सुरक्षा, मानव तस्करी और एसिड अटैक के मामले सबसे अधिक बंगाल में दर्ज किए गए हैं।