सूत्रों का कहना है कि शाह ने लोकसभा क्षेत्रों की जमीनी हकीकत को जानने और समझने के लिए कोर ग्रुप समितियों को बुलाया था, जिसके बाद इन टीमों का गठन किया गया। चूंकि इन टीमों को चुनाव के लिए बनाया गया है, इसलिए इन्हें चुनावी टोली नाम दिया गया। शाह इससे पहले राजस्थान, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिमी बंगाल, गुजरात, दादर नगर हवेली और उत्तर पूर्वी राज्यों खासकर असम में इन टोलियों के प्रदर्शन की समीक्षा कर चुके हैं।
'जमीन' पर कॉर्डिनेशन करती हैं टोलियां
सूत्रों ने बताया कि 'चुनावी टोली' चुनावों से जुड़े के कामकाज के अलावा, जमीन के स्तर पर पार्टी की ताकत और नेटवर्क को मजबूत बनाने का भी काम करती है। इसके अलावा ये संबंधित लोकसभा क्षेत्र में सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के साथ समन्वय भी बनाते हैं। इसके अलावा एक बेहद महत्वपूर्ण काम भी इन टोलियों को सौंपा गया है, जिसमें ये स्थानीय मीडिया और ओपेनियन मेकरों के साथ बेहतर सामंजस्य भी बनाएंगी।
20 प्वाइंट्स चेकलिस्ट
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अध्यक्षजी ने पार्टी की जीत के इरादे से प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र को कैटेगरी में बांटा है और इसके लिए 20 प्वाइंट्स चेकलिस्ट बनाई गई है। जिसमें बूथ कमेटियों, कार्यकर्ताओं के नाम, उनके पास उचित वाहन है या नहीं, यहां तक कि कार्यकर्ताओं के पास स्मार्टफोन से लेकर तमाम जानकारियां इन टीमों के पास मौजूद हैं। उदाहरण के लिए ऐसे राज्य जहां पार्टी किसी हिस्से में बेहद मजबूत है और किसी हिस्से में जनाधार नहीं है, ऐसे में हमें वहां संगठनात्मक रूप से मजबूत होने की जरूरत है और इस तरह की समीक्षा से हमें व्यवस्थित रूप से मजबूत होने में मदद मिलेगी।
वहीं भाजपा अध्यक्ष इन टीमों के क्रियाकलापों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, इन्हें उनकी तरफ से नियमित रूप से निर्देश और मार्गदर्शन भी दिए जाते हैं, साथ ही उनकी गतिविधियों और भागीदारी पर भी निगरानी की जाती है। पार्टी सूत्रों की मानें तो लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी की अंतिम रणनीति इन खास टोलियों से मिले फीडबैक के आधार पर ही तैयार की जाएगी।
पार्टी में नए सदस्य जोड़ती हैं टोलियां
सूत्रों का कहना है कि ये खास टोलियां न केवल अपने लोकसभा क्षेत्रों में प्रत्येक बूथ में मतदाताओं की सूची को सत्यापित करेगी, साथ ही एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों के दो दर्जन सदस्यों का चयन करके पार्टी के साथ जोड़ने का भी काम करेंगी। इससे न केवल भाजपा की चुनावी रणनीति मजबूत होगी, साथ ही बूथ नेटवर्क को और मजबूत बनाने में भी मदद मिलेगी।