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'चुनावी टोलियों' से जमीनी हकीकत को भांप रहे हैं अमित शाह

Wed, 04 Jul 2018 07:57 PM IST
हरेन्द्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इन दिनों जहां कहीं भी दौरे पर जा रहे हैं एक खास तरह की 'टोलियों' से जरूर मिल रहे हैं, जिनसे मिले फीडबैक के बाद ही वे  पार्टी की अंतिम रणनीति तैयार करते हैं। इन टोलियों में पार्टी ने युवा चेहरों को मौका दिया है और सभी लोकसभा क्षेत्रों में ऐसी टोलियां बनाई गई हैं। शाह की ये नई 'टोलियां' उनके संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने की रणनीति का नतीजा हैं।

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18 राज्यों का दौरा कर चुके हैं शाह 
2019 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इन दिनों राष्ट्रव्यापी दौरों में व्यस्त हैं। 22 जुलाई को वह अपने इस अभियान का पहला चरण पूरा कर लेंगे। पहले चरण में शाह ने देश की सभी 543 लोकसभा सीटों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है।

शाह अभी तक अपनी राष्ट्रव्यापी यात्रा के जरिए 2014 से अभी तक 18 प्रदेशों का दौरा करके 395 संसदीय सीटों तक अपनी पहुंच बना चुके हैं। शाह महाराष्ट्र और गोवा के दौरे के साथ ही पहले दौर के अभियान को पूरा कर लेंगे। इस दौरान वे न केवल सांगठनिक चुनौतियों से भी दोचार हो रहे हैं, बल्कि उनकी कोशिश है कि चुनावों से पहले ही संगठन को दुरुस्त कर लिया जाए।
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टोलियों के टीम लीडर पुराने धुरंधर 
पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि अपनी इन यात्राओं के दौरान शाह देशभर की लोकसभा सीटों पर पार्टी की बनाई गई नई 'चुनावी टोलियों' के अलावा पदाधिकारियों, राज्य इकाइयों के कोर कमेटी के सदस्यों, अनुसूचित जाति एवं जनजाति मोर्चों और सोशल मीडिया टीम के सदस्यों से बंद दरवाजों के भीतर खास मुलाकात कर रहे हैं।

इन चुनावी टोलियों को आगामी लोकसभा चुनावों को मद्देनजर रखते हुए बनाया गया है। इन टोलियों में नए चेहरे तो हैं ही, साथ जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं के अलावा इनका प्रभारी लोकसभा क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए मंजे हुए पुराने धुरंधरों को बनाया गया है।

संसदीय क्षेत्रों के लिए बनी टोलियां 

सूत्रों का कहना है कि शाह ने लोकसभा क्षेत्रों की जमीनी हकीकत को जानने और समझने के लिए कोर ग्रुप समितियों को बुलाया था, जिसके बाद इन टीमों का गठन किया गया। चूंकि इन टीमों को चुनाव के लिए बनाया गया है, इसलिए इन्हें चुनावी टोली नाम दिया गया। शाह इससे पहले राजस्थान, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिमी बंगाल, गुजरात, दादर नगर हवेली और उत्तर पूर्वी राज्यों खासकर असम में इन टोलियों के प्रदर्शन की समीक्षा कर चुके हैं।

'जमीन' पर कॉर्डिनेशन करती हैं टोलियां  
सूत्रों ने बताया कि 'चुनावी टोली' चुनावों से जुड़े के कामकाज के अलावा, जमीन के स्तर पर पार्टी की ताकत और नेटवर्क को मजबूत बनाने का भी काम करती है। इसके अलावा ये संबंधित लोकसभा क्षेत्र में सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के साथ समन्वय भी बनाते हैं। इसके अलावा एक बेहद महत्वपूर्ण काम भी इन टोलियों को सौंपा गया है, जिसमें ये स्थानीय मीडिया और ओपेनियन मेकरों के साथ बेहतर सामंजस्य भी बनाएंगी। 

20 प्वाइंट्स चेकलिस्ट
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अध्यक्षजी ने पार्टी की जीत के इरादे से प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र को कैटेगरी में बांटा है और इसके लिए 20 प्वाइंट्स चेकलिस्ट बनाई गई है। जिसमें बूथ कमेटियों, कार्यकर्ताओं के नाम, उनके पास उचित वाहन है या नहीं, यहां तक कि कार्यकर्ताओं के पास स्मार्टफोन से लेकर तमाम जानकारियां इन टीमों के पास मौजूद हैं। उदाहरण के लिए ऐसे राज्य जहां पार्टी किसी हिस्से में बेहद मजबूत है और किसी हिस्से में जनाधार नहीं है, ऐसे में हमें वहां संगठनात्मक रूप से मजबूत होने की जरूरत है और इस तरह की समीक्षा से हमें व्यवस्थित रूप से मजबूत होने में मदद मिलेगी। 
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टोलियों के फीडबैक से बनती है रणनीति 

वहीं भाजपा अध्यक्ष इन टीमों के क्रियाकलापों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, इन्हें उनकी तरफ से नियमित रूप से निर्देश और मार्गदर्शन भी दिए जाते हैं, साथ ही उनकी गतिविधियों और भागीदारी पर भी निगरानी की जाती है। पार्टी सूत्रों की मानें तो लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी की अंतिम रणनीति इन खास टोलियों से मिले फीडबैक के आधार पर ही तैयार की जाएगी।

पार्टी में नए सदस्य जोड़ती हैं टोलियां
सूत्रों का कहना है कि ये खास टोलियां न केवल अपने लोकसभा क्षेत्रों में प्रत्येक बूथ में मतदाताओं की सूची को सत्यापित करेगी, साथ ही एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों के दो दर्जन सदस्यों का चयन करके पार्टी के साथ जोड़ने का भी काम करेंगी। इससे न केवल भाजपा की चुनावी रणनीति मजबूत होगी, साथ ही बूथ नेटवर्क को और मजबूत बनाने में भी मदद मिलेगी। 
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