भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह को बीजेपी की राजनीति का चाणक्य यूं ही नहीं माना जाता है। इसके पीछे उनका लगभग तीन दशकों का अनुभव और संघर्ष है जिसकी शुरुआत अहमदाबाद के नारणपुरा वार्ड में बीजेपी के एक बूथ एजेंट के रूप में हुई। यही कारण है कि वे न केवल पार्टी के कार्यकर्ताओं की भावनाओं को समझते हैं बल्कि मतदाताओं कि मन:स्थिति को भी भांप सकते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अपने चुनावी दौरे के बाद वे आश्वस्त हैं कि लचर कानून व्यवस्था, पिछड़ापन, किसानों की बदहाली और बेरोजगारी से ऊबी प्रदेश की जनता भाजपा के सुशासन लाने के वादे पर विश्वास कर दो तिहाई बहुमत का तोहफा देगी।
शाह का कहना है कि कांग्रेस से हाथ मिलाकर अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी की छवि सिर्फ मीडिया के लिए ही बदल सकते हैं, जबकि प्रदेश कि जनता भली-भांति जानती है कि सपा में कोई मूल परिवर्तन नहीं हुआ है क्योंकि इस बार भी अखिलेश ने उन्हीं आपराधिक छवि के लोगों को टिकट दिया है जिनके अत्याचारों से जनता त्रस्त थी। अमर उजाला के राजीव जायसवाल और हिमांशु मिश्र से बातचीत में शाह कहते हैं कि जनता सब समझती है और अब वह सत्ता परिवर्तन चाहती है। पेश है शाह से हुई विस्तृत बातचीत-
अमर उजाला- भाजपा ने उत्तर प्रदेश के चुनाव घोषणा पत्र में किसानों का कर्ज माफ करने, ब्याजमुक्त ऋण देने का वादा किया है। सवाल उठता है कि आपने आम बजट के जरिए मौके का लाभ क्यों नहीं उठाया। अगर आप आम बजट में कर्ज माफी की बात करते तो इसका अन्य चुनावी राज्यों के साथ पूरे देश को संदेश जाता।
अमित शाह - भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में उत्तर प्रदेश के लघु और सीमांत किसानों के लिए कर्ज माफी और ब्याज रहित ऋण उपलब्ध कराने का वादा किया है। राज्य में छोटी-छोटी जोत के मालिक सीमांत और लघु किसान दशकों से बेहद मुसीबत में हैं। यह वादा हमने चुनावी लाभ लेने के लिए नहीं किया है। आप संकल्प पत्र का अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि इन किसानों की हालत सुधारने के लिए पार्टी ने कई उपाय करने की घोषणा की है। मसलन 25 डेयरियां स्थापित करने, दो हफ्ते के अंदर गन्ना मूल्य भुगतान, पुराना बकाया 120 दिन के अंदर करने, सरकारी स्तर पर धान खरीदी करने, सिंचाई का जाल बिछाने और पशुधन की रक्षा के लिए कत्लखाने बंद करने का वादा किया है। हमने जो भी वादे किए हैं, उसके लिए व्यापक अध्ययन किया है। इन वादों को पूरा करने के लिए इन्हें बजट में ही समाहित करने की बात कही है। इससे हमारी जिम्मेदारी का अहसास होता है।
अमर उजाला - चुनाव में भाजपा का ध्यान महिला मतदाताओं पर भी है। सोशल मीडिया में सशक्त नारी समान अधिकार, भाजपा लाएगी ऐसी सरकार, जैसे नारों की गूंज है। मगर सवाल यह है कि पार्टी के पास महिला वर्ग का एक भी जाना-माना चेहरा क्यों नहीं है, जबकि आपके प्रतिद्वंद्वियों के पास प्रियंका गांधी, डिंपल यादव और मायावती जैसे जाने-माने चेहरे हैं?
अमित शाह - जिन्हें आप जाना-माना चेहरा बता रहे हैं, उनका चुनावी इतिहास क्या है? प्रियंका जी कितने चुनाव लड़ी हैं? डिंपलजी का चुनावी इतिहास परिवार के कारण है। इसके इतर भाजपा ने अन्य दलों के मुकाबले सबसे ज्यादा महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है। ऐसी महिला उम्मीदवार जो वर्षों से जमीनी स्तर पर ब्लॉक स्तर पर लगातार संघर्ष करते हुए आगे बढ़ी हैं।
अमर उजाला - आपकी पार्टी लगातार महिला सुरक्षा को मुद्दा बना रही है। इस आधी आबादी को सुरक्षा प्रदान करने के लिए आपकी भावी योजना क्या है?
अमित शाह - जाहिर तौर पर उत्तर प्रदेश में महिलाओं की स्थिति बेहद बुरी है। खासतौर से इस वर्ग के लिए शिक्षा हासिल करना लगातार दुष्कर होता जा रहा है। कॉलेज में ऐसा वातावरण नहीं है कि लड़कियां सही तरीके से तनावमुक्त होकर शिक्षा समाप्त कर सके। इस कारण जिनके पास संसाधन हैं वे अपनी लड़कियों को दिल्ली या अन्य शहरों में भेज रहे हैं। जिनके पास संसाधन नहीं हैं, उनकी लड़कियां बीच में ही पढ़ाई छोड़ देने पर विवश हैं। इसलिए हमने तय किया है कि हमारी सरकार आने पर हर कॉलेज के बगल में थाना होगा। इसमें एंटी रोमियो दल रहेंगे। हर जिले में प्रताड़ना से बचाने के लिए महिला पुलिस का अलग स्क्वायड होगा। तीन रिजर्व महिला बटालियन गठित की जाएंगी और तत्काल कार्यवाही के लिए एक महिला हेल्प नंबर जारी किया जाएगा।