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BJP की नई टीम पर संघ की नजर: खींची लक्ष्मण रेखा, आभासी दुनिया से बाहर आएं नेता; सत्ता के लालचियों से रहे दूरी

सार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम पर चेतावनी दी है। संघ का कहना है कि नई पीढ़ी के नेता जमीन पर काम करने के बजाय आभासी राजनीति में उलझे हैं। संगठन ने साफ हिदायत दी है कि केवल सत्ता के लिए काम करने वालों को जगह न मिले। संघ चाहती है कि नेता वैचारिक रूप से मजबूत हों और जनता से सीधे जुड़ाव बनाए रखें, ताकि दशकों से बना जमीनी संपर्क तंत्र कमजोर न पड़े।

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नितिन नवीन, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भाजपा - फोटो : X-@BJPLive
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भारतीय जनता पार्टी की नवीन टीम के स्वरूप की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने लक्ष्मण रेखा खींच दी है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के नए संगठन का ढांचा तैयार करने की कवायद पर संघ काफी सजग है। संघ की सबसे बड़ी आपत्ति इस बात पर है कि नई पीढ़ी के नेता जमीन पर पसीना बहाने के बजाय केवल आभासी दुनिया की राजनीति में उलझ कर रह गए हैं।  संघ की साफ हिदायत है कि संगठन में उन लोगों को कतई जगह न मिले जो विचारधारा की कीमत पर केवल सत्ता का सुख भोगना चाहते हैं।

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पार्टी की कमान ऐसे हाथों में होनी चाहिए जो वैचारिक रूप से मजबूत हों और जिनका जनता से सीधा संपर्क हो। हाल के वर्षों में संघ इस बात से काफी नाराज और फिक्रमंद है कि भाजपा नेताओं का जनता से सीधा संवाद लगातार कम हो रहा है। नेता जमीन पर जाकर लोगों के बीच काम करने के बजाय संचार माध्यमों पर अपनी लोकप्रियता चमकाने का आसान रास्ता अपना रहे हैं। संघ का मानना है कि दशकों की मेहनत से बना भाजपा का सबसे मजबूत जमीनी संपर्क तंत्र इन आभासी माध्यमों के हावी होने से कमजोर पड़ रहा है।

सत्ता का सुख चाहने वालों से रहें सावधान
संघ ने भाजपा नेतृत्व को साफ नसीहत दी है कि पार्टी में नए लोगों के प्रवेश के लिए एक कड़ा पैमाना तय होना ही चाहिए। यह पहचानना बहुत जरूरी है कि कौन सा नेता सिर्फ सत्ता का हिस्सा बनने आ रहा है और कौन पार्टी विचारधारा के लिए जुड़ रहा है। संघ की सख्त सलाह है कि नई कार्यकारिणी बनाते समय हर हाल में वैचारिक निष्ठा और वैचारिक प्रशिक्षण को ही सबसे बड़ा मानक माना जाए।
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इसलिए अहम है संघ का यह हस्तक्षेप
दरअसल नितिन नवीन के इस नए संगठन के जरिये पार्टी में एक बड़ा पीढ़ीगत बदलाव होने जा रहा है। यह नई पौध सिर्फ आज के लिए नहीं बल्कि अगले पंद्रह से बीस वर्षों तक भाजपा की दशा और दिशा तय करेगी। आने वाले चुनावों में कई दिग्गज नेता शायद चुनावी राजनीति से किनारे हो जाएंगे। ऐसे में संघ चाहता है कि पार्टी की कमान जिन नए हाथों में जाए उनकी वैचारिक जड़ें बहुत मजबूत हों और वे सेवा, संगठन और समर्पण के मूल मंत्र पर खरे उतरें। फिलहाल पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद ही नई कार्यकारिणी की घोषणा की जाएगी।
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