यूपी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा अध्यक्ष की योजना के चलते पूरे प्रदेश में भाजपा के पार्टी कार्यालयों का नक्शा ही बदल रहा है। फरवरी में ही लखनऊ में अमित शाह ने एक भाजपा के नए मुख्यालय की आधारशिला रखी थी। उस समय शाह ने जब दीवारों पर पान की पीकें और अस्त-व्यस्त माहौल देखा तो उन्हें बहुत ही बुरा लगा।
एनडीटीवी में छपी खबर के अनुसार अब भाजपा लखनऊ में अपने कार्यकर्ताओं को रेडियो फ्रीक्वेंसी चिप वाला अटेंडेंस कार्ड भी मुहैया कराने जा रही है। उपस्थिति दर्ज करने के लिए स्वाइप मशीन लगाई जाएगी। विधानसभा के बिल्कुल सामने स्थित इस ऑफिस को भाजपा की तरफ से इतना एडवांस बना दिया जाएगा कि पार्टी दिग्गजों को हर वक्त पता रहेगा कि कौन कार्यालय आया था और कौन नहीं?
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता के कहा- 'हम लगभग 15 सालों से सत्ता से बाहर हैं। लगभग हर नेता पार्टी कार्यालय केवल तभी आता है, जब उसे आने के लिए जबरदस्ती कहा जाता है। दोपहर का खाना खाने के लिए घर जाना और फिर थोड़ी देर तक सोना सभी के लिए जैसे बहुत जरूरी काम हो गया है। अब हमे बदलने को कहा गया है।'
यूनिक नंबर के साथ मिलने वाला इलेक्ट्रॉनिक कार्ड पार्टी के कार्यकर्ताओं को सरकार की पॉलिसी और पार्टी के अन्य जरूरी दस्तावेजों तक पार्टी के हर कार्यकर्ता की ऑनलाइन पहुंच को सुनिश्चित करेगा। इतना ही नहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अपनी हर मुलाकात और चर्चाओं के बारे में ऑनलाइन बताया पड़ेगा।
जुलाई से ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। पहले फेज में मंडल स्तर के ऑफिसों के करीब 1800 वरिष्ठ नेताओं को ऑनलाइन किया जाएगा। इसके बाद अगले चरण में करीब 1.5 लाख कार्यकर्ताओं को भी ऑनलाइन किया जाएगा, जिन्हें मतदान के समय निगरानी करने की जिम्मेदारी दी जाती है।
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि 2013 में जब प्रधानमंत्री मोदी पार्टी ऑफिस आए थे, तो उनका अनुभव काफी बुरा रहा था। उन्होंने देखा था कि वहां पर कार्यकर्ता और नेता सिर्फ तभी आते थे, जब कोई वरिष्ठ नेता दौरे पर आता था। इतना ही नहीं, मोदी को नेताओं द्वारा पैर छूने की परंपरा भी बहुत बुरी लगी। मोदी को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया कि इनमें से अधिकतर नेता तो जनता के बीच भी नहीं जाते। सरकार की तरफ से उठाए गए इस कदम से यह साफ होता है कि मोदी को अपना पुराना अनुभव अच्छे से याद है।