शिवमोगा में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान 'वंदे मातरम' के केवल दो अंतरे बजाए जाने पर भाजपा विधायक एस. एन. चन्नाबसप्पा ने कड़ा विरोध जताते हुए वॉकआउट किया। इस घटना के बाद से यह विवाद एक बार फिर से गहरा गया है। आइए जानते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और राष्ट्रगीत (वंदे मातरम) को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।
कर्नाटक के शिवमोगा में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के पूरे गायन की जगह केवल दो अंतरे बजाए जाने पर भाजपा विधायक ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और सभा से वॉकआउट कर दिया। यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के मौके पर मंगलवार को शिवमोगा जिला प्रशासन की ओर से डॉ. बी आर अंबेडकर भवन में आयोजित किया गया था।
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इस समारोह की अध्यक्षता शिवमोगा से भाजपा विधायक एस एन चन्नाबसप्पा कर रहे थे। कार्यक्रम में जिले के डिप्टी कमिश्नर सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान जब राष्ट्रगीत बजाया गया, तो वह दो अंतरे (पैराग्राफ) के बाद अचानक रुक गया। इस पर विधायक ने पूरा गीत बजाने की मांग की, लेकिन प्रशासन ने राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए इसे आगे नहीं बजाया। इसके विरोध में विधायक कार्यक्रम छोड़कर चले गए।
दरअसल, केंद्र सरकार ने वंदे मातरम के 150वें साल के मौके पर इसी साल जनवरी में एक निर्देश जारी किया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, जब भी राष्ट्रगान 'जन गण मन' और राष्ट्रगीत एक साथ प्रस्तुत किए जाएं, तो राष्ट्रगान से पहले वंदे मातरम के सभी 6 अंतरे गाए जाने जरूरी हैं।
दूसरी तरफ, कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने 10 सितंबर 2026 को एक अलग आदेश जारी किया। इस आदेश में सामान्य सरकारी कार्यक्रमों के दौरान वंदे मातरम के केवल पहले दो अंतरे गाने का नियम तय किया गया, जो केंद्र सरकार के नियमों के बिल्कुल उलट है।