ठाणे की एक अदालत ने भाजपा के एक विधायक, एक आईएएस अधिकारी और सात अन्य के खिलाफ दाखिल एक शिकायत का संज्ञान लिया है। उन पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए एक ग्राम सहकारी समिति को पंजीकृत कराने का आरोप है। उल्हासनगर की मजिस्ट्रेट अदालत ने प्रभु गोविंद पाटिल की ओर से दायर शिकायत का संज्ञान लिया। पाटिल ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उसके फर्जी दस्तखत का इस्तेमाल करके अनधिकृत रूप से उसे भी सहकारी समिति का सदस्य बना डाला।
मजिस्ट्रेट शैलजा पांडेय ने पाटिल की ओर से दाखिल शिकायत और इसके समर्थन में दी गई सामग्री पर गौर किया और सभी नौ आरोपियों के खिलाफ प्रक्रिया जारी करने के आदेश दिए। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया शिकायत से आरोपों की पुष्टि होती है। प्रक्रिया जारी करना किसी दीवानी मुकदमे या आपराधिक अभियोजन की कार्यवाही है और खासकर किसी अदालत की ओर से इस्तेमाल की गई रिट या औपचारिक नोटिस है ताकि अदालत किसी व्यक्ति या संपत्ति पर अपने अधिकार क्षेत्र का उपयोग कर सके।
अदालत ने कहा, ‘‘शिकायत और दस्तावेजों का अध्ययन किया, जिनसे प्रथम दृष्टया खुलासा होता है कि सागव परिसर विविध कार्यकारी सेवा संस्था नाम की समिति का पंजीकरण हुआ। इसके अलावा, कुछ सदस्यों के मृत्यु प्रमाण पत्र से खुलासा होता है कि उनके निधन के बाद समिति का पंजीकरण किया गया।’’
मजिस्ट्रेट ने कहा, ‘‘चूंकि आरोपी उक्त समिति के प्रमोटर हैं, ऐसे में प्रथम दृष्टया यह कहा जा सकता है कि उन्होंने मृतकों के फर्जी दस्तखत का इस्तेमाल करके उनके नाम पर समिति का पंजीकरण करा लिया।’’
शिकायत और संबंधित दस्तावेजों पर विचार करने के बाद यह कहा जा सकता है कि प्रथम दृष्टया शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है। अदालत ने आईपीसी की धारा 420, 408, 467, 468, 471 और 120 के तहत आरोपियों के खिलाफ प्रक्रिया जारी की है। अब आरोपियों को अदालत में पेश होना होगा और शिकायत पर अपने जवाब दाखिल करने होंगे। शिकायत के मुताबिक, ठाणे जिले के मुरबड़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक किशन कठोरे ने 2011 में ‘सागव परिसर विविध कार्यकारी सेवा संस्था’ नाम की एक सहकारी समिति का गठन किया और वह इस समिति के प्रमुख प्रमोटर थे।