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महाराष्ट्र भाषा विवाद: भाजपा विधायक का पलटवार, कहा- पहली कक्षा से हिंदी अनिवार्य नहीं, विपक्ष कर रहा गुमराह

Sat, 28 Jun 2025 05:40 PM IST
रिया दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

महाराष्ट्र में जारी भाषा विवाद के बीच भाजपा विधायक प्रवीण दरेकर ने विपक्षी दल पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा को पहली कक्षा से अनिवार्य नहीं किया गया है, इसके बावजूद विपक्षी दल इस मुद्दे का अनावश्यक राजनीतिकरण कर रहे हैं। 
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भाजपा विधायक प्रवीण दरेकर - फोटो : ANI
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विस्तार
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महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को लेकर जारी विवाद के बीच भाजपा विधायक प्रवीण दरेकर ने विपक्षी दल पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल महाराष्ट्र के लोगों को गुमराह कर रहे हैं कि स्कूलों में पहली कक्षा से हिंदी को अनिवार्य विषय बनाया जा रहा है। दरेकर ने विपक्षी दल पर इस मुद्दे का अनावश्यक राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। 

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ठाकरे ने खुद मंजूरी दी थी

दरेकर ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू त्रिभाषा फॉर्मूला में हिंदी को अनिवार्य नहीं किया गया है और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इसे दोहराया है। उन्होंने कहा कि यह उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली महाविकास अघाड़ी सरकार थी, जिसने माशेलकर समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया था, जिसमें तीन-भाषा नीति भी शामिल थी।। उस समिति में मुंबई विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति भालचंद्र मुंगेकर भी शामिल थे। अभ ठाकरे उसी नीति का विरोध क्यों कर रहे हैं, जिसे उन्होंने खुद मंजूरी दी थी। 

त्रिभाषा नीति छात्रों के लिए फायदेमंद

बीजेपी नेता ने दावा किया कि त्रिभाषा नीति से छात्रों को लाभ होगा क्योंकि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी होगी। उन्होंने कहा कि छोटी उम्र से ही तीन भाषाएं सीखने से उन्हें मदद मिलेगी। हिंदी को अनिवार्य नहीं किया गया है, बल्कि पहली कक्षा से हिंदी पढ़ना वैकल्पिक है। इसके बावजूद विपक्ष गलत सूचना फैला रहा है और अशांति पैदा करने का प्रयास कर रहा है। विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन तथ्यों की अनदेखी करके नहीं। दरेकर ने कहा कि भाषा के नाम पर डर पैदा करने के बजाय विपक्ष को मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करनी चाहिए।

महायुति गठबंधन में मतभेद की खबरों को किया खारिज 

भाजपा नेता ने महायुति गठबंधन में भाषा नीति को लेकर मतभेद की खबरों को भी खारिज किया। महायुति गठबंधन में भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी गठबंधन में छोटे-मोटे मतभेद होना आम बात है। इससे मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। तीनों दल मिलकर सरकार चला रहे हैं और सामूहिक रूप से निर्णय ले रहे हैं। 

17 जून को जारी हुआ आदेश 

महाराष्ट्र सरकार ने 17 जून को एक सरकारी आदेश (जीआर) जारी किया, जिसमें पहली से पांचवीं कक्षा तक अंग्रेजी और मराठी माध्यम के छात्रों के लिए हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में शामिल किया गया है। हालांकि यह अनिवार्य नहीं है। वहीं, विपक्षी दल शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने आरोप लगाया कि बीजेपी इस नीति के जरिए हिंदी को क्षेत्रीय भाषाओं, विशेषकर मराठी, के ऊपर प्राथमिकता देने का छुपा हुआ एजेंडा चला रही है।

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