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ED: सीमेंट कंपनी ने फर्जीवाड़ा कर लिया 952 करोड़ का ऋण, बैंक ने NPA घोषित किया, अब असली मालिकों को मिली राशि

Sat, 28 Jun 2025 05:34 PM IST
निर्मल कांत डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला

सार

ED: मुंबई की एक विशेष अदालत ने वडराज सीमेंट की 952 करोड़ रुपये की जब्त संपत्ति को सही दावेदार को लौटाने की अनुमति दी है। यह फैसला ईडी की जांच के बाद आया, जिसमें पाया गया था कि कंपनी ने फर्जी तरीके से ऋण लेकर धोखाधड़ी की थी। अब नुवोको विस्टास कंपनी इस संपत्ति को लेकर बकाया भुगतान करेगी और बंद कंपनी को फिर से शुरू करने की योजना है।
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ED - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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मुंबई की एक विशेष अदालत (पीएमएलए) ने पीएमएलए, 2002 के तहत वडराज सीमेंट लिमिटेड की 952 करोड़ रुपये की कुर्क संपत्ति की बहाली की अनुमति दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा संपत्तियों को उनके असली मालिकों को लौटाने और उत्पादक संपत्तियों को उपयोग में लाने के लिए वित्तीय संस्थानों को ईडी द्वारा कुर्क या जब्त/सुरक्षित संपत्तियों का मुद्रीकरण करने में सक्षम बनाने के लिए चल रहे प्रयासों के क्रम में, इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (आईएलएंडएफएस) मामले में ईडी द्वारा एक ठोस प्रयास किया गया। इस संबंध में ईडी द्वारा जारी एनओसी के बाद, विशेष न्यायालय (पीएमएलए), मुंबई द्वारा 25 जून के आदेश के तहत 952 करोड़ रुपये की संपत्ति सही दावेदार को लौटा दी गई। 
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ईडी, मुंबई जोनल कार्यालय ने अपराध की आय (पीओसी) के सृजन और शोधन में उनकी संलिप्तता के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (आईएलएंडएफएस), इसकी समूह कंपनियों और अन्य संबद्ध संस्थाओं के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पता चला कि एबीजी की एक समूह कंपनी वडराज सीमेंट लिमिटेड (पूर्व में एबीजी सीमेंट लिमिटेड) ने आईएलएंडएफएस फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड से वित्तीय सहायता ली थी, जिसे बाद में गैर-निष्पादित घोषित कर दिया गया था। जांच में पाया गया कि 952 करोड़ रुपये के ऋण धोखाधड़ी से प्राप्त किए गए थे। उन्हें पीओसी के रूप में पहचाना गया था। इसके बाद, वडराज सीमेंट लिमिटेड की अचल संपत्तियां, जिसमें सूरत सीमेंट प्लांट शामिल है, को ईडी ने 21 जनवरी 2020 को अनंतिम रूप से कुर्क किया था। 

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कुर्की की पुष्टि न्यायाधिकरण ने 5 अगस्त 2021 को कर दी थी। इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के लिए अभियोजन शिकायत भी विशेष न्यायालय (पीएमएलए), मुंबई के समक्ष दायर की गई, जिसमें पीओसी के रूप में कुर्क की गई संपत्तियों को जब्त करने की प्रार्थना की गई। बंद हो चुकी सीमेंट कंपनी के अन्य प्रमुख ऋणदाताओं में यूनियन बैंक (1,620 करोड़ रुपये), इंडियन ओवरसीज बैंक (1,419 करोड़ रुपये), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (1,391 करोड़ रुपये) और जेसी फ्लावर एआरसी (677 करोड़ रुपये) शामिल हैं। 

इसके बाद, निरमा समूह की एक सहायक कंपनी, मेसर्स नुवोको विस्टास कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने दिवाला एवं दिवालियापन संहिता, 2016 (आईबीसी) के तहत सफल समाधान आवेदक के तौर पर, विशेष न्यायालय (पीएमएलए), मुंबई के समक्ष एक आवेदन दायर किया। इसमें राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी), मुंबई द्वारा एक अप्रैल 2025 को अनुमोदित समाधान योजना के कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने के लिए कुर्क संपत्ति की बहाली की मांग की गई। नुवोको विस्टास कॉर्पोरेशन लिमिटेड वडराज सीमेंट लिमिटेड के अधिग्रहण के बदले अपने वित्तीय लेनदारों को 1,706 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा। पीएमएलए के इरादे को ध्यान में रखते हुए पीओसी को वास्तविक वैध दावेदारों को बहाल करने के लिए, ईडी ने वास्तविक वैध दावेदारों से जुड़ी संपत्ति की रिहाई के लिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के समक्ष कोई आपत्ति नहीं प्रस्तुत की। 

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ईडी के उपर्युक्त प्रस्तुतीकरण के आधार पर, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने दिनांक 25.06.2025 को कुर्क की गई अचल संपत्तियों को वास्तविक वैध दावेदारों को वापस करने का आदेश पारित किया। विशेष न्यायालय (पीएमएलए), मुंबई ने पीएमएलए विशेष मामला संख्या 6/2019 में अपने आदेश के तहत उक्त आवेदन को स्वीकार कर लिया है। पीएमएल (संपत्ति की बहाली) नियम, 2016 के नियम 3ए के साथ पीएमएलए की धारा 8(8) और 8(7) के तहत नुवोको विस्टास कॉर्पोरेशन लिमिटेड को कुर्क की गई संपत्ति की बहाली का निर्देश दिया है। न्यायालय ने आवेदक को भविष्य में निर्देशानुसार संपत्ति या उसके मूल्य को वापस करने या बहाल करने के लिए एक वचनबद्धता प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। 

न्यायालय ने ईडी को कब्जा सौंपने से पहले संपत्ति की विस्तृत सूची तैयार करने का भी निर्देश दिया है। बहाली आदेश पूरी तरह से मुंबई जोनल कार्यालय द्वारा की गई जांच से उत्पन्न 952 करोड़ रुपये की कुर्की से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय ने पीओसी का पता लगाने और उसे वापस पाने के लिए अपने निरंतर प्रयास जारी रखे हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया है कि वैध तृतीय-पक्ष हितों को कानून और न्यायिक निर्देशों के अनुसार निपटाया जाए। प्रवर्तन निदेशालय वित्तीय अपराधों से निपटने और ऐसे अपराधों के पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को कायम रखता है।

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