गुजरात चुनाव इस बार कई मायनो में खास होने वाला है। एक ओर जहां भाजपा अपने विकास को मुद्दा बनाकर एकबार फिर सत्ता पर काबिज होने के लिए जीतोड़ मेहनत कर रही है, वहीं कांग्रेस अपनी 22 पहले खोई सत्ता को वापस पाने के लिए जोड़ -तोड़ करने में जुटी है।
इसी बीच एक खबर आ रही है कि बड़ी संख्या में गुजरात के मुसलमान इस चुनाव में टिकट पाने के लिए लाइन में लग गए हैं। 2011 के बाद यह पहली बार है कि बड़ी संख्या में मुसलमान बीजेपी से टिकट पाना चाहते हैं। इससे पहले अल्पसंख्यक बहुत तेजी से बीजेपी की तरफ तब आकर्षित हुए थे जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात में अपनी छवि सुधारने के लिए सद्भावना मिशन लांच किया था।
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पांच साल बाद एक बार फिर मुस्लिम नेता सचमुच सद्भावना का इंतजार कर रहे हैं। 1980 के चुनावों में जहां एक उम्मीदवार को टिकट दिया था वहीं 1998 में समुदाय को आकर्षित करने के लिए बीजेपी ने अल्पसंख्यक उम्मीदवारों का पत्ता खेला था।