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Maharashtra Politics: 'हिंदू विरोधी और जिहादी सोच से प्रेरित', ठाकरे बंधुओं की रैली पर नितेश राणे का तीखा हमला

Sat, 05 Jul 2025 02:57 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की संयुक्त रैली पर महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने जमकर निशाना साधा। राणे ने इसे हिंदू विरोधी और जिहादी सोच से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया कि ठाकरे बंधुओं के साथ आने का मकसद समाज को बांटना और राज्य को कमजोर करना है। वहीं दूसरी ओर भाजपा नेता मुनगंटीवार ने इसे भाइयों का स्वागतयोग्य मेल बताया।

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राज ठाकरे, उद्धव ठाकरे और नितेश राणे - फोटो : PTI/ANI
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विस्तार
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20 साल बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एक साथ आने से महाराष्ट्र की सियासत में गर्माहट तेज हो गई है। इसी सिलसिले में महाराष्ट्र के मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की हालिया संयुक्त रैली पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने इस रैली को जिहादी और हिंदू विरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि इसका मकसद समाज को बांटना और राज्य को कमजोर करना है। बता दें कि शनिवार को मुंबई के वर्ली इलाके में आवाज मराठिचा नाम से आयोजित इस रैली में ठाकरे बंधु दो दशक बाद एक साथ मंच पर नजर आए। यह रैली राज्य सरकार की तरफ से स्कूलों में कक्षा एक से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में लागू करने संबंधी दो सरकारी आदेशों को वापस लेने के फैसले की जीत के रूप में आयोजित की गई थी।

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राणे ने ठाकरे बंधु पर लगाए गंभीर आरोप
इस सिलसिल में ठाकरे बंधुओं के इस रैली से एक दिन पहले पत्रकारों से बातचीत में नितेश राणे ने कहा कि हम हिंदू हैं और मराठी पर गर्व करते हैं। जिस तरह से जिहादी संगठन समाज को तोड़ने की कोशिश करते हैं, उसी तरह ठाकरे बंधु भी कर रहे हैं। चाहे वह पीएफआई हो या सिमी, ये दोनों भी वैसी ही मानसिकता से काम कर रहे हैं। यह रैली राज्य और हिंदू समाज को नुकसान पहुंचाएगी। राणे ने यह भी कहा कि वर्ली की रैली के बाद नल बाजार (मुंबई का मुस्लिम बहुल इलाका) में मिठाई बांटी जाएगी और पटाखे फोड़े जाएंगे। ये सब हिन्दू समाज के खिलाफ है।
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हालांकि, दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने इस मुद्दे पर संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर राज और उद्धव ठाकरे एक साथ आ रहे हैं तो यह अच्छी बात है। दोनों भाइयों को एक होना चाहिए और साथ रहना चाहिए। अगर जरूरत पड़े तो उनकी पार्टियों का विलय भी हो सकता है।
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तीन-भाषा नीति पर भाजपा नेता ने दी सफाई
इसके साथ ही तीन भाषा नीति को लेकर चल रहे विवाद पर मुनगंटीवार ने कहा कि इसे राजनीति का मुद्दा नहीं बनाया गया था। उन्होंने बताया कि यह नीति खुद उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री रहते गठित समिति की सिफारिशों पर आधारित थी। उन्होंने कहा कि हिंदी को केवल कक्षा 5 के बाद अनिवार्य किया जाना था, जबकि मराठी और अंग्रेजी पहले से ही कक्षा 1 से अनिवार्य हैं। इसमें मराठी पर कोई हमला नहीं है। गौरतलब है कि सरकार ने फिलहाल यह नीति सरकार ने वापस ले ली है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में गर्मी ला दी है और ठाकरे बंधुओं की नजदीकी ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएं छेड़ दी हैं।

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