पार्टी सूत्रों का कहना है कि जब कर्नाटक में कुमारस्वामी 38 सीटों के साथ कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना सकते हैं, तो आंध्र प्रदेश में भाजपा ऐसा क्यों नहीं कर सकती। सूत्रों का कहना है कि इसके लिए जरूरी है कि भाजपा को राज्य में तीसरी विकल्प के रूप में पेश किया जाए।
गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश में वतर्मान विधानसभा में टीडीपी की 103, वाईएसआरसीपी की 66 और भाजपा की 4 सीटें हैं। भाजपा का मानना है कि टीडीपी के ‘‘दुष्प्रचार’’ के मुकाबले के लिए राज्य में व्यापक स्तर पर संपर्क कार्यक्रम चलाने की जरूरत है।
एंटी इंकंबेंसी फैक्टर का मिलेगा फायदा
सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने आंध्र प्रदेश में पार्टी को मजबूती देने के लिए राज्य को 3 जोन में विभाजित किया है। जिसके तहत पार्टी बूथ स्तर पर कमेटी बनाने के अलावा डोर-टू-डोर कैंपेन शुरू करेगी और सत्ताधारी पार्टी टीडीपी सरकार में भ्रष्टाचार और सरकारी योजनाओं के लिए धन के दुरुपयोग को जनता के सामने रखेगी।
साथ ही भाजपा ने टीडीपी के खिलाफ पैदा हुए एंटी इंकंबेंसी फैक्टर का फायदा उठाने के लिए भी रणनीति तैयार की है। इसके लिए टीडीपी को अवसरवादी पार्टी के रूप में लोगों के सामने पेश करने की होगी। इसके अलावा भाजपा उन आरोपों से निपटने के लिए काम करेगी, जिसमें टीडीपी राज्य के विकास में केंद्र की भाजपा सरकार के सहयोग न मिलने का प्रचार कर रही है।
कोर कमेटी की बैठक में पार्टी ने आंध्रप्रदेश में प्रचार के लिए 3 वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों नितिन गडकरी, पीयूष गोयल एवं प्रकाश जावड़ेकर को जिम्मेदारी सौंपी है। जिसमें केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं के लाभों को घर-घर तक पहुंचाया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा की रणनीति है कि टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस की मांगों को भी 'अपने तरीके से' जनता के सामने पेश किया जाए। सूत्रों का कहना है कि हाल ही में 11 जून को आंध्र प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष कन्ना लक्ष्मी नारायण ने राजधानी में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी।
नवनिर्वाचित भाजपा अध्यक्ष और पूर्व कांग्रेसी नेता ने राज्य की 12 मांगों की सूची प्रधानमंत्री को सौंपी, जिसमें विजाग रेलवे जोन, कडप्पा स्टील प्लांट, गिरिजन यूनिवर्सिटी, विजयवाड़ा और विशाखापट्टनम में मेट्रो चलाने और चार रायलसीमा वाले जिलों में विशेष औद्योगिक गलियारा बनाने की मांग उठाई गई।
इसमें गौर करने वाली बात यह है कि ये सभी 12 मांगें राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की उन 19 मांगों वाली सूची से ली गई हैं, जिनके पूरा न होने के चलते नायडू ने एनडीए से किनारा कर लिया था। लेकिन कन्ना लक्ष्मी नारायण की सूची में राज्य को विशेष दर्जा देने और पोलावरम प्रोजेक्ट के विस्थापितों के पुर्नवास और जमीन अधिग्रहण को लेकर केन्द्र से मिलने वाली 33 हजार करोड़ रुपए का राशि का कोई जिक्र नहीं था। असल में केन्द्र में बैठी भाजपा इसे स्वर्णिम अवसर के तौर पर देख रही है कि कैसे टीडीपी सरकार पर प्रभावित परिवारों की अनदेखी का आरोप लगा कर सत्ता तक पहुंचने का रास्ता तय किया जा सकता है।