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पुणे उपचुनावः कस्बा पेठ में हिंदू महासभा ने बढ़ाई भाजपा की मुसीबत, ब्राह्मणों की नाराजगी पड़ सकती है भारी

Sun, 12 Feb 2023 02:56 AM IST
वीरेंद्र शर्मा सुरेंद्र मिश्र, मुंबई

सार

पुणे की कस्बा पेठ से भाजपा विधायक मुक्ता तिलक और चिंचवड़ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक रहे लक्ष्मण जगताप के निधन के कारण उपचुनाव हो रहे है। चिंचवड़ से भाजपा ने जगताप की पत्नी अश्विनी जगताप को मैदान में उतारा है।
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भाजपा - फोटो : Social Media
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विस्तार
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महाराष्ट्र में पुणे की दो विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव में भाजपा को इस बार एक साथ कई मोर्चे पर जूझना पड़ रहा है। एक तरफ महा विकास आघाड़ी (एमवीए) के तीनों दल शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी ने एकजुट होकर भाजपा के सामने उम्मीदवार उतारा है। दूसरी तरफ, एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ भाजपा अकेले मैदान में है। ब्राह्मण बाहुल्य कस्बा पेठ सीट पर गैरब्राह्मण प्रत्याशी उतारने का खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ सकता है। वहीं, हिंदू महासभा के प्रत्याशी ने भी भाजपा की मुसीबत बढ़ा दी है।
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पुणे की कस्बा पेठ से भाजपा विधायक मुक्ता तिलक और चिंचवड़ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक रहे लक्ष्मण जगताप के निधन के कारण उपचुनाव हो रहे है। चिंचवड़ से भाजपा ने जगताप की पत्नी अश्विनी जगताप को मैदान में उतारा है। दूसरी ओर, एनसीपी ने एमवीए के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में नाना काटे को उम्मीदवारी दी है। कस्बा पेठ से भाजपा ने हेमंत रसाने और एमवीए से कांग्रेस ने रवीन्द्र धंगेकर को टिकट दिया है। शुक्रवार को नामांकन वापसी के बाद चिंचवड़ में 28 और कस्बा पेठ सीट पर 16 उम्मीदवार मैदान में है। चिंचवड़ में भाजपा उम्मीदवार को सहानुभूति का लाभ मिल सकता है और नाना काटे के सामने शिवसेना (उद्धव गुट) के बागी राहुल कुलाटे भी अश्विनी जगताप की चुनावी राह आसान बना सकते हैं लेकिन कस्बा पेठ में भाजपा को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

कस्बा पेठ ब्राह्मण बाहुल्य है सीट 
कस्बा पेठ ब्राह्मण बाहुल्य सीट है जहां बीते कई दशक से ब्राह्मण उम्मीदवार चुनाव जीतता रहा है। मुक्ता तिलक के पति शैलेश तिलक चुनाव लड़ने के इच्छुक थे। लेकिन इस बार भाजपा ने ओबीसी समाज के हेमंत रसाने को मैदान में उतारकर ब्राह्मणों को नाराज कर दिया है। पुणे में बैनर लगे हैं कि मेधा कुलकर्णी की सीट गई, मुक्ता तिलक की सीट गई और अब गिरीश बापट (सांसद) का नंबर है। ब्राह्मण समाज कितना सहन करेगा। हिंदू महासभा के उम्मीदवार आनंद दवे ब्राह्मण महासंघ के अध्यक्ष भी हैं। इसलिए ब्राह्मणों का झुकाव उनकी तरफ होने का सीधा नुकसान भाजपा को हो सकता है। हालांकि दिवंगत मुक्ता तिलक के पुत्र कुणाल तिलक भाजपा प्रत्याशी के प्रचार अभियान में शामिल हैं, लेकिन ब्राह्मणों की नाराजगी कायम है।
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